देशभर में केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के बीच एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर आवाज तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प देने के बावजूद कर्मचारियों का रुझान इसके प्रति बहुत कम देखने को मिला है। कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि एनपीएस (NPS) और यूपीएस (UPS) जैसे विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें केवल पुरानी पेंशन ही चाहिए।
30 लाख में से केवल 30,000 ने चुना UPS
केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले लगभग 30 लाख एनपीएस कर्मचारियों में से केवल 30,000 कर्मचारियों ने ही यूपीएस को अपनाया है। यानी कुल का केवल 1% से भी कम। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि कर्मचारियों को UPS में भरोसा नहीं है।
सरकार ने 30 जून तक सभी पात्र एनपीएस कर्मचारियों को UPS में शामिल होने का मौका दिया था और 20 मई को UPS पेंशन कैलकुलेटर भी लॉन्च किया था। इसके बावजूद कर्मचारियों की प्रतिक्रिया बेहद ठंडी रही।
UPS की सबसे बड़ी खामी: अनिश्चितता
नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, UPS योजना की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी अनिश्चितता है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में UPS या NPS में से कौन बेहतर रहेगा, यह तय करना मुश्किल है क्योंकि इसमें वेतन आयोग, डीए और अन्य भत्तों की भूमिका भी होती है। इसके अलावा, UPS में पेंशन गणना आयु और जीवन प्रत्याशा पर आधारित है, जो हर कर्मचारी के लिए अलग हो सकती है।
कम पेंशन और परिवार को न्यूनतम लाभ
डॉ. पटेल ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई कर्मचारी 30-35 वर्षों की सेवा के बाद रिटायर होता है और UPS में जाता है, तो उसे अंतिम वेतन का औसतन केवल 30% तक ही पेंशन मिलती है। यदि उसकी मृत्यु जल्दी हो जाए, तो पत्नी को केवल 18% पेंशन मिलती है और नॉमिनी को कुछ भी नहीं।
इसके उलट, एनपीएस में रिटायरमेंट के बाद अच्छी-खासी एकमुश्त राशि, मासिक पेंशन, और परिवार को भी भविष्य में लाभ मिलता है।
एनपीएस बनाम यूपीएस: गणना के आधार पर तुलना
| योजना | कुल सेवा | कॉर्पस राशि | मासिक पेंशन | मृत्यु के बाद लाभ |
|---|---|---|---|---|
| NPS | 34 साल | 3.5 करोड़ | ₹70,000 | पत्नी को ₹70,000 और नॉमिनी को ₹1.4 करोड़ |
| UPS | 34 साल | 2.91 करोड़ | ₹1.10 लाख (DA सहित) | पत्नी को ₹66,600 और नॉमिनी को कुछ नहीं |
UPS में कर्मचारी का अंशदान ले लिया जाएगा। वही पर NPS में कर्मचारी का 60% अंशदान उनको वापिस मिलेगा। यह तुलना बताती है कि UPS में लाभ लंबे जीवन पर निर्भर है, जबकि NPS में परिवार को भी वित्तीय सुरक्षा मिलती है।
कर्मचारी संगठन क्यों मांग रहे हैं पुरानी पेंशन (OPS) योजना?
AIDEF के महासचिव सी. श्रीकुमार और कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने स्पष्ट कहा है कि कर्मचारी UPS और NPS जैसे विकल्पों से थक चुके हैं। उनका एक ही लक्ष्य है – पुरानी पेंशन योजना की बहाली।
उनका मानना है कि यदि सरकार UPS को वाकई आकर्षक बनाना चाहती है, तो सेवानिवृत्ति से ठीक पहले इसका विकल्प देने की छूट होनी चाहिए, ताकि कर्मचारी अपनी पारिवारिक और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सही फैसला ले सकें।
सरकार के सामने नई चुनौती
UPS के प्रति कर्मचारियों का ठंडा रुख अब सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है। जहां UPS योजना से पुरानी पेंशन योजना जैसा भरोसा नहीं बन पाया है, वहीं कर्मचारियों का भरोसा केवल OPS में बना हुआ है।
कई संगठनों ने साफ कर दिया है कि अगर OPS बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन हो सकता है।
निष्कर्ष:
केंद्र सरकार की नई योजना UPS के प्रति कर्मचारियों का रुझान बेहद कम है। OPS की बहाली की मांग को नज़रअंदाज़ करना अब मुश्किल होता जा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक और सामाजिक गर्मी ला सकता है।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
माझ्या लेखांचा उद्देश लोकांना अचूक, योग्य आणि विश्वासार्ह माहिती उपलब्ध करून देणे हा आहे. मी नेहमी प्रयत्न करतो की माझ्या लेखनातील भाषा साधी-सोप्या स्वरूपाची असावी, माहिती उपयोगी असावी आणि वाचकांना कोणत्याही विषयाचे आकलन करण्यात अडचण येऊ नये.

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