अगर आप या आपके परिवार में कोई पेंशन प्राप्त करता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पेंशनभोगियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसले दिये है जो कि हर पेंशनभोगी के लिए जानना बेहद ही जरूरी है।
यह फैसला पेंशन और वेतन संशोधन से जुड़े आपके अधिकारों को स्पष्ट करता है। लेकिन अफसोस की बात है कि इस फैसले की सही जानकारी बहुत कम लोगों तक पहुंची है। आइए, जानते हैं इस फैसले की मुख्य बातें जो हर पेंशनधारक को जाननी चाहिए।
पेंशन है आपका अधिकार, कोई अनुग्रह नहीं
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि पेंशन केवल सरकार की इच्छा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह एक अधिकार है। जब कोई कर्मचारी नियमों के अनुसार पेंशन पाने का हकदार होता है, तो उसे वह पेंशन मिलना आवश्यक है। यह कोई ‘भेंट’ या ‘सौगात’ नहीं है, बल्कि आपकी मेहनत और सेवा का फल है।
वेतन और पेंशन संशोधन एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं
न्यायालय ने यह भी कहा कि वेतन में हो रहे बदलाव और पेंशन में संशोधन अलग-अलग नहीं हो सकते। जब भी सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ता है, तो पेंशन में भी उसके अनुसार वृद्धि होनी चाहिए।
पेंशन की न्यूनतम सीमा
फैसले के अनुसार, पेंशन की राशि कम से कम मूल वेतन के 50% के बराबर होनी चाहिए। यह न्यूनतम स्तर तय किया गया है ताकि पेंशनधारकों को न्याय मिले।
सरकार आर्थिक भार का हवाला देकर पेंशन रोक नहीं सकती
सरकार यह तर्क नहीं दे सकती कि पेंशन देने में आर्थिक बोझ पड़ता है। पेंशनधारकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसे कोई भी आर्थिक कारण मानकर टाला नहीं जा सकता।
अनावश्यक मुकदमों से बचाव
सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचे और पेंशन के मामले में झंझट पैदा करने वाली नीतियों से दूर रहे। इससे पेंशनधारकों को राहत मिलेगी और उनकी परेशानियां कम होंगी।
पेंशन में सुधार भी आपका अधिकार है
पेंशन को समय-समय पर बढ़ाया जाना भी आपका अधिकार है। इसे कोई उपहार या अनुग्रह न समझा जाए। सरकार बिना कारण इस सुधार को टाल नहीं सकती।
कर्नाटक उच्च न्यायालय का आदेश – जीवन प्रमाणपत्र और पेंशन की सुरक्षा
हाल ही में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया है कि यदि कोई पेंशनधारक समय पर अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा नहीं करता, तो पेंशन रोकने से पहले बैंक को उस व्यक्ति के घर जाकर स्थिति का पता लगाना होगा।
- अदालत ने बकाया पेंशन भुगतान का भी आदेश दिया है।
- साथ ही, 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
- बकाया भुगतान 6% ब्याज सहित दो सप्ताह के भीतर करना होगा।
- अगर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़ाकर 18% कर दी जाएगी।
सभी बैंक अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से पालन करना होगा।
आपकी जिम्मेदारी – इस संदेश को फैलाएं!
प्रिय पेंशनधारक मित्रों, कृपया इस महत्वपूर्ण जानकारी को कम से कम 25 लोगों तक जरूर पहुंचाएं। जिनके पास पेंशन नहीं है, उन्हें भी भेजें क्योंकि वे भी हमारे देश के नागरिक हैं। आपसे अनुरोध है कि इसे आगे भी फैलाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने अधिकारों से अवगत हो सकें। अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, तो तीन दिनों के भीतर यह संदेश पूरे देश में पहुंच सकता है।
अंत में
यह जानकारी न केवल आपके लिए बल्कि आपके परिवार और समाज के लिए भी बेहद जरूरी है। अपने अधिकारों को समझें और उन्हें सुरक्षित रखें। सही जानकारी और जागरूकता से ही हम बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
माझ्या लेखांचा उद्देश लोकांना अचूक, योग्य आणि विश्वासार्ह माहिती उपलब्ध करून देणे हा आहे. मी नेहमी प्रयत्न करतो की माझ्या लेखनातील भाषा साधी-सोप्या स्वरूपाची असावी, माहिती उपयोगी असावी आणि वाचकांना कोणत्याही विषयाचे आकलन करण्यात अडचण येऊ नये.

Ops lagu karo
माननीय सर्वोच्च न्यायालय का सराहनीय कदम जो धन्यवाद ज्ञापित करनें योग्य है कि पेंशनर मात्र दया के पात्र नहीं हैं
क्या माननीय सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बैंक पेंशनरों के लिए भी मान्य होगा या नहीं
कृपया जरूर बताएं
क्या यह नियम बैंक कर्मचारियों पर भी लागू होगा।।
विशेष – हर बैंक के कर्मचारियों का उसी बैंक में पेंशन फंड होता है जो सब मिलकर लगभग हजारों करोड़ रुपए है मगर बैंकों का संगठन इसपर कोई बात नहीं करता है और कर्मचारी यूनियन को मासिक चंदा नहीं मिलता। वैसे लगभग तीन साल से उच्चतम न्यायालय में वाद लगा है और तारीख पर तारीख पड़ रही है। क्या किया जाए? मैं ७७ वर्ष का हूं और कब ऊपर से बुलावा आए मगर बढ़ी पेंशन नहीं मिलेगी।
गया प्रसाद टंडन लखनऊ। बैंक कर्मचारी।
क्या इस फैसले से ओ पी एस लागू होगी? कुछ राज्य सरकारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं वहां केंद्रीय सरकार की तरफ से पैंशनरों की समस्याओं के निवारण के लिए क्या कदम उठाये जाते हैं।
Media wale sirf air dikha rahe hai eps pentationers ko .increase decision effected date Supreme Court ka judgement epfo ka implementation ki koi ja nkari nahi di ja rahi hai sarkar ka decesision sabhi air me hai
Pension to chhodie sarkar army service ke dauran milne wale benefits (Pay and allowances) tak to theek se de nahi pati hai aur aadmi retire bhi ho jata hai, tatha account office dwara final settlement bhi kar diya jata hai. Bhagwan hi malik hai is desh ka.
Jo insan kisi bhi sarkari naukari pane me asfal raha aur private dukano aadi par kam karke pariwar chalaya aur buddha ho gaya ,usko toh koi pension nahin milati hai toh kya use bakare ki tarah halal karane ki yojana sarkar ke pass hai kya?
Bank pensioners suffering from non revision of pension since long time appx. 28 years. Neither IBA nor Govt. Of India see for the plight conditions of Bk. Pensioner. Many of them are 70 years & above. Dying day by day hoping for their revision. Now only hope in GOD. perhaps the justice will be achieved.
Ups nahi ops jaankari dein.
ये सरकार इतनी तानाशाह हैं कि कोर्ट का भी इस पर कोई असर नहीं
मेरी पत्नी का पैंशन प्रकरण 6 वर्षो से उच्च न्यायालय ग्वालियर में लंबित है ।आज तक कोई फैसला नहीं हुआ।क्या ऐसे प्रकरणों में कोई समय सीमा तय है, बहुत से प्रकरणो में पैंशन धारकों की मृत्यु भी हो जाती है ।
Where is letter of Supreme Court decision please furnish first.
Bank pensioners are still awaiting the decision of Supreme Court for updation of bank pension since last more than 10 years even after knocking the door of Finance Ministry on this issue.Only tarikh pe tarikh is being awarded and nothing else.Neither Govt nor honourable Supreme Court are serious on updation of pensions of bank pensioner.Many pensioners have expired leaving this world with a hope that they would see the pension updation in their life and would get the benefit.The bank employees have created the pension fund of their own to the tune of 427112 crore and they are deprived of pension updation from their own money.They are begging of their own money and the honourable Supreme court is still giving tarikh pe tarikh…….
मध्य प्रदेश सरकार पेंशन भोगियों को का महगाई भत्ता का एरियर नहीं देती है। केंद्र के सामान समय से महंगाई भत्ता नहीं दिया जाता है। यदि केंद्र द्वारा महंगाई भते की घोषणा होने के बाद तुरंत देय तिथि से मध्यप्रदेश सरकार घोषणा करदे तो यह शिकायत अपने आप हल हों जावेगी।
What about eps 95 hamra pension ka pisa ti pension kaha gaya hame kyu nahi di jati. Pension hamari pension kab badhegie
Manniya suprim court ka thank-you so motch this order
Kripya private company walo ki epfo pension ke baare main jaroor dhyan de taki unhe achi pension mil sake jisse ki vo apna aur apni family kaa sahi dhang se gujara chala sake….
Mere father ke ek Army extended beema ki yojna tak ke paise khaa gaye, pahle kahte the ki beema dharak ke marne ke baad milega ,baad mai gaye to bola gaya ki iska time out ho gaya ,aaj uss baat ko 35 se 40 saal ke aas paas ho chuka hai, ab hum kya kare kiske yaha matha maare..father expired hue bhi 8 saal ho chuke hai…
आठवें वेतन आयोग में पेंशनर को सुधारित पेंशन का लाभ ,और महंगाई भत्ता लागू नहीं कर रही है। क्या ये मानवता की दृष्टि से सही फैसला है?
Manneye uch Nayalai ka Tahedil sukriya karta hoo hum date batado kab se milega bara paisa
सर्वोच्च न्यायालय व्दारा पेंशनधारकों को शानदार तौहफा दिये जाने का मैं पुरजोर समर्थन एवं ढ़ेरों बधाईयां देता हूं. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में शीघ्रातिशीघ्र आर्डर जारी किए जायें ऐसी अपेक्षा की जाती है.
पुनः बधाईयां
Thank you honorable Supreme court for giving relief to us pensioners.God bless you honorable chief justice.
We have great expectations from you even in your short term of service.
सरकार ईपीएफ धारी पेंशन के लिए कुछ करना चाहिए । इतने साल प्राइवेट स्कूल में नौकरी करके देश की भविष्य बनाने बालों के पेंशन सिर्फ 3000 से 7000रुपया । ये ठीक नहीं है । उनके लिए भी n p s होना आवश्यक। जब वो बूढ़े हो जाएंगे तब वो पैसा तिल के समान होता है ।
Thanks a lot for caring the rights of Pensioners by The court
GOVT .IS NOT ATALL INTERESTED WITH THE PENSIONERS. MINIMUM PENSION HIKE IS NOW DREAM. WE HVE TO LIVE WITH RS1000 ONLY THAT IS WHAT GOVT.WANTS.
राज्य सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर पैंशन व केन्द्र के समान महंगाई तक नहीं दे पा रही है। हिमाचल प्रदेश में व अन्य राज्यों में कुछ विभागों में घोषणा के बाद सात य आठ माह तक महंगाई भत्ता नहीं दे पा रही हैं।
M.P. State me pensioners ke DAIDR
Dene me Laphrarwayi ki Jati he .bahut let pensioners ko pareshan karne ke bad manjur kar thi he. Aur lot of months ka arrears kha jati he.
M.p state bahur poor and pichhada state he. Qya kare. Pensioners ke paisa se M.P state ka Vikas ho raha he.
Case details of supreme court not provided????
To stopped of recovery of commutation from pension after retirement 12 year.in this connection,what happened ?
When it will be approved by Govt
and notified by epfo.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आर्डर तारीख सहित देने का कष्ट करें
मैं वर्ष December 2012 में क्षेत्रीय विद्युत भार नियंत्रणालय,उ.प्र.पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड, पोस्ट नारायनपुर,चौबेपुर, वाराणसी से सेवानिवृत्त हुए हैं। कार्यालय ज्ञापन संख्या – 1365-अनु०-9/9369/के०डी०एस / तद् दिनांक 07/10/2015 के अनुसार मेरा ग्रेच्युटी रुपया 100000/-में से रुपये 600000/-रोककर अवशेष धनराशि रुपया 400000/- मुझे भुगतान किया गया।400के०वी० विद्युत उपकेंद्र, सारनाथ परिसर उ०प्र०पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लि०, वाराणसी से सेवानिवृत्त हुए हैं, के पक्ष में रिट याचिका संख्या -ए०-33620/2012(कुलदीप सिंह बनाम स्टेट आफ यू०पी०एव अन्य) में मा०उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश दिनांक 27-07-2012 एवं 25-09-2012 जिसके द्वारा रिकवरी को स्थगित किया गया है के अनुपालन में ग्रेच्युटी से रुपया 600000/-रोककर अवशेष धनराशि रुपया 400000/-केवल भुगतान किया गया। Kuldeep Singh,Ret.J. E. Ashokpuram Colony, Meerapur Basahi, Sindhora Road, Varanasi Email -kdsingh.aldsvns@gmail.com.