सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय केंद्र सरकार द्वारा उस समय लिया गया था जब छठे केंद्रीय वेतन आयोग (6th CPC) की सिफारिशों को लागू किया गया था। खासकर उन पेंशनरों के लिए जो 1 जनवरी 2006 से पहले रिटायर हो चुके थे, उनकी पेंशन प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
क्या था पेंशन संशोधन का मुख्य उद्देश्य?
सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि पूर्व-2006 पेंशनरों को न्यूनतम पेंशन उस पे-स्केल के अनुसार मिले जिससे वे रिटायर हुए थे। शुरुआत में यह प्रावधान किया गया था कि उनकी पेंशन उस पे बैंड और ग्रेड पे का कम से कम 50% होगी, जिसमें वे कार्यरत थे।
लेकिन यदि रिटायरमेंट के समय किसी पेंशनर की कुल सेवा 33 वर्षों से कम थी, तो पेंशन में उसी अनुपात में कटौती की जानी थी। यह नियम कई विवादों का कारण भी बना।
कोर्ट के फैसलों ने बदली तस्वीर
1 नवंबर 2011 को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली ने एक आदेश दिया जिसे दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी मान्यता दी गई। इसके अनुसार:
- न्यूनतम पेंशन की गणना फिटमेंट टेबल के आधार पर की जाएगी, जो 1 जनवरी 2006 को सेवा में रहे कर्मचारियों के वेतन निर्धारण के लिए लागू हुआ था।
इसके बाद 30 जुलाई 2015 को जारी कार्यालय ज्ञापन (O.M.) में यह स्पष्ट किया गया कि पे बैंड + ग्रेड पे का न्यूनतम वेतन ही पेंशन निर्धारण का आधार बनेगा।
33 वर्ष की सेवा से लिंक खत्म
16 अगस्त 2013 को CAT, एर्नाकुलम बेंच के एक फैसले को हाई कोर्ट ऑफ केरल और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया। इसके बाद 6 अप्रैल 2016 को सरकार ने एक और O.M. जारी किया, जिसमें कहा गया:
अब न्यूनतम पेंशन में कोई कटौती नहीं होगी, भले ही सेवा अवधि 33 साल से कम क्यों न हो।
यह एक ऐतिहासिक निर्णय था जो यह सुनिश्चित करता है कि 1 जनवरी 2006 या उसके बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन 33 साल की सेवा से जोड़ी नहीं जाएगी।
निष्कर्ष
छठे वेतन आयोग के तहत पेंशनरों को न्याय दिलाने के लिए अदालतों के निर्णयों और सरकार की कार्रवाइयों ने एक मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। इससे लाखों पेंशनरों को लाभ पहुंचा है, विशेषकर उन लोगों को जिनकी सेवा अवधि 33 वर्ष से कम थी।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
माझ्या लेखांचा उद्देश लोकांना अचूक, योग्य आणि विश्वासार्ह माहिती उपलब्ध करून देणे हा आहे. मी नेहमी प्रयत्न करतो की माझ्या लेखनातील भाषा साधी-सोप्या स्वरूपाची असावी, माहिती उपयोगी असावी आणि वाचकांना कोणत्याही विषयाचे आकलन करण्यात अडचण येऊ नये.
