देशभर के लाखों केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशन प्राप्तकर्ताओं के बीच एक सवाल अक्सर चर्चा में रहता है कि क्या 79 वर्ष की आयु पूरी होने पर 20% अतिरिक्त पेंशन (Additional Pension) मिलनी शुरू हो जाती है, या इसके लिए 80 वर्ष पूरे होने का इंतजार करना पड़ता है?
इस सवाल की वजह गुवाहाटी हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले और सरकारी नियमों की अलग-अलग व्याख्या है। आइए पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
क्या कहते हैं वर्तमान सरकारी नियम?
केंद्रीय सरकार के लागू पेंशन नियमों के अनुसार अतिरिक्त पेंशन आयु के आधार पर दी जाती है। सामान्य रूप से इसका लाभ इस प्रकार निर्धारित है—
| आयु | अतिरिक्त पेंशन |
|---|---|
| 80 वर्ष से 85 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 20% |
| 85 वर्ष से 90 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 30% |
| 90 वर्ष से 95 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 40% |
| 95 वर्ष से 100 वर्ष से कम | मूल पेंशन का 50% |
| 100 वर्ष या उससे अधिक | मूल पेंशन का 100% |
इन नियमों के अनुसार 79 वर्ष की आयु में सामान्य रूप से 20% अतिरिक्त पेंशन का लाभ नहीं दिया जाता।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
15 मार्च 2018 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया था। न्यायालय ने अपने समक्ष आए मामले में यह माना कि संबंधित सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश को 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही, अर्थात 79 वर्ष पूरे होने के बाद, 20% अतिरिक्त पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।
न्यायालय ने अपने निर्णय में यह व्याख्या की कि “80वें वर्ष में प्रवेश” का अर्थ केवल 80 वर्ष पूरे होना नहीं है, बल्कि 79 वर्ष पूरे होने के बाद शुरू होने वाला वर्ष भी है।
यही कारण है कि यह फैसला आज भी पेंशनर्स के बीच चर्चा का विषय बना रहता है।
क्या यह फैसला सभी केंद्रीय पेंशनर्स पर लागू है?
यहीं सबसे महत्वपूर्ण बात समझने की है।
गुवाहाटी हाईकोर्ट का यह निर्णय हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से संबंधित विशेष कानून की व्याख्या पर आधारित था। इसलिए इसे सभी केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स पर स्वतः लागू नहीं माना गया।
बाद के वर्षों में सरकार ने अपने पेंशन नियमों और स्पष्टीकरणों में यह स्पष्ट किया कि सामान्य केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स के लिए अतिरिक्त पेंशन का भुगतान लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा। व्यवहार में अधिकांश मामलों में 20% अतिरिक्त पेंशन का लाभ 80 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद दिया जाता है।
पेंशनर्स में भ्रम क्यों है?
भ्रम के मुख्य कारण हैं—
- गुवाहाटी हाईकोर्ट का 2018 का फैसला।
- सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी का प्रसार।
- अलग-अलग मामलों में अलग कानूनी प्रावधान लागू होना।
- न्यायालय के विशेष मामले और सामान्य पेंशन नियमों के बीच अंतर।
इसी वजह से कई पेंशनर्स यह मान लेते हैं कि 79 वर्ष पूरे होते ही सभी को 20% अतिरिक्त पेंशन मिल जाएगी, जबकि वर्तमान में सामान्य सरकारी पेंशन नियमों के तहत ऐसा स्वतः लागू नहीं है।
यदि कोई पेंशनर दावा करना चाहे तो क्या कर सकता है?
यदि किसी पेंशनर का मानना है कि वह गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले का लाभ पाने का पात्र है, तो वह संबंधित पेंशन वितरण प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त कर सकता है या आवश्यक होने पर कानूनी सलाह ले सकता है। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके लागू नियमों, सेवा शर्तों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
निष्कर्ष
79 वर्ष की आयु पर 20% अतिरिक्त पेंशन को लेकर चर्चा लंबे समय से जारी है। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अपने एक विशेष मामले में 80वें वर्ष में प्रवेश से लाभ देने की व्याख्या की थी, लेकिन यह निर्णय सभी केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स पर स्वतः लागू नहीं माना गया है।
वर्तमान सरकारी व्यवस्था में सामान्य रूप से अतिरिक्त पेंशन का लाभ 80 वर्ष की आयु के निर्धारित नियमों के अनुसार दिया जाता है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित सरकारी आदेश, पेंशन नियम और अपने विभाग द्वारा जारी निर्देशों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी पेंशन संबंधी दावा या निर्णय के लिए संबंधित सरकारी आदेश, विभागीय निर्देश या सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त जानकारी को ही अंतिम माना जाए।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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