OPS Restoration Latest Update: पुरानी पेंशन योजना यानी Old Pension Scheme (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग कर रहे केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS को बहाल करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने इसका प्रमुख कारण पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़ा दीर्घकालिक और अस्थिर राजकोषीय बोझ बताया है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में दिए लिखित जवाब में OPS, NPS और UPS से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। इस जवाब के बाद केंद्रीय कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर चल रही उम्मीदों पर फिलहाल विराम लग गया है।
संसद में OPS पर सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर सवाल पूछा गया था। सरकार से यह जानना चाहा गया था कि क्या केंद्र सरकार OPS को दोबारा लागू करने की योजना बना रही है और NPS में शामिल कर्मचारियों की पेंशन संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जवाब में कहा कि सरकार राजकोष पर पड़ने वाले अस्थिर वित्तीय दायित्व के कारण OPS से दूर हुई थी। सरकार ने यह भी बताया कि राज्यों में OPS की बहाली संबंधित राज्य सरकारों के नीतिगत अधिकार क्षेत्र का विषय है।
इसका सीधा मतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए OPS की वापसी पर अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS की वापसी क्यों नहीं?
OPS और NPS में सबसे बड़ा अंतर उनकी पेंशन व्यवस्था का है। OPS में पात्र सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार पेंशन मिलती है, जबकि NPS एक Defined Contribution यानी परिभाषित अंशदान आधारित व्यवस्था है।
NPS में कर्मचारी और सरकार दोनों की ओर से योगदान किया जाता है। इस राशि को निवेश किया जाता है और सेवानिवृत्ति के समय बनने वाले कॉर्पस के आधार पर पेंशन संबंधी लाभ निर्धारित होते हैं।
सरकार का तर्क है कि OPS को दोबारा लागू करने से भविष्य में सरकारी खजाने पर लंबे समय तक बड़ा वित्तीय दायित्व पैदा हो सकता है। संसद में दिए जवाब में सरकार ने यह भी कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की हालिया राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्टों में भी राज्यों द्वारा OPS पर वापस जाने के वित्तीय प्रभावों को उजागर किया गया है।
NPS कब लागू हुआ था?
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS को 1 जनवरी 2004 से लागू किया गया था। यह व्यवस्था उस तारीख या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू हुई, हालांकि सशस्त्र बलों को इससे बाहर रखा गया था।
NPS को लागू करने का उद्देश्य सेवानिवृत्ति के लिए एक अंशदान आधारित पेंशन व्यवस्था तैयार करना था। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता यानी केंद्र सरकार दोनों योगदान करते हैं।
लेकिन समय के साथ NPS के तहत मिलने वाले संभावित पेंशन लाभ को लेकर कर्मचारियों की ओर से कई सवाल और मांगें सामने आईं। कर्मचारियों के संगठनों ने सरकार से ऐसी व्यवस्था की मांग की जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद अधिक निश्चित और महंगाई से जुड़ा पेंशन लाभ मिल सके।
UPS से कर्मचारियों को क्या फायदा मिलेगा?
NPS से जुड़े कर्मचारियों की पेंशन संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने Unified Pension Scheme (UPS) को NPS के तहत एक विकल्प के रूप में लागू किया है।
सरकार के अनुसार UPS को 1 अप्रैल 2025 से NPS के अंतर्गत विकल्प के रूप में लागू किया गया। इसका उद्देश्य NPS के दायरे में आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई से जुड़ा परिभाषित लाभ और सेवानिवृत्ति के बाद न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान उपलब्ध कराना है।
सरकार के संसद में दिए जवाब के अनुसार UPS में पात्रता पूरी करने वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम ₹10,000 प्रति माह की सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान है।
हालांकि, UPS भी OPS की तरह पूरी तरह बिना अंशदान वाली व्यवस्था नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPS एक fund-based payout system है, जिसमें कर्मचारी और केंद्र सरकार दोनों के योगदान का नियमित संचय और निवेश किया जाता है।
NPS में कितना पैसा जमा है?
सरकार ने संसद में NPS के तहत केंद्रीय कर्मचारियों से संबंधित कॉर्पस की स्थिति भी बताई है।
26 जुलाई 2026 तक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के NPS के तहत Assets Under Management (AUM) ₹3.65 लाख करोड़ बताया गया है। यह राशि NPS के तहत जमा और निवेश किए गए फंड के बड़े आकार को दर्शाती है।
यही कारण है कि NPS से OPS में वापस जाने का मुद्दा केवल पेंशन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जमा कॉर्पस, निवेश और कानूनी प्रावधान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्यों में OPS बहाली की क्या स्थिति है?
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्यों में OPS बहाल करने का फैसला संबंधित राज्य सरकार के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है।
सरकार के संसद में दिए जवाब के अनुसार राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने NPS से OPS की ओर लौटने के संबंध में केंद्र सरकार और PFRDA को जानकारी दी है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आया है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि PFRDA Act, 2013 और NPS से जुड़े मौजूदा नियमों के तहत NPS में जमा कर्मचारी और सरकार के योगदान तथा उससे हुई आय को राज्य सरकारों को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है।
इसका अर्थ यह है कि किसी राज्य द्वारा OPS बहाल करने का निर्णय लेने के बावजूद NPS में पहले से जमा पूरा कॉर्पस वापस पाने का रास्ता मौजूदा कानूनी ढांचे में उपलब्ध नहीं है।
क्या 8वें वेतन आयोग से OPS की उम्मीद है?
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में कई तरह की उम्मीदें हैं। कुछ कर्मचारी संगठन वेतन के साथ-साथ पेंशन व्यवस्था में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं।
लेकिन 8वें वेतन आयोग और OPS की बहाली को दो अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखना जरूरी है। सरकार का ताजा संसद जवाब OPS की वापसी पर है और इसमें फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए OPS बहाली का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं बताया गया है।
इसलिए केवल 8वें वेतन आयोग के गठन या उसकी सिफारिशों के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS अपने आप वापस आ जाएगी।
कर्मचारियों के लिए अब क्या विकल्प है?
सरकार की मौजूदा नीति के अनुसार NPS के दायरे में आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए UPS एक महत्वपूर्ण विकल्प बन चुका है। UPS को NPS के तहत लागू किया गया है और इसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद अधिक सुनिश्चित तथा महंगाई से जुड़ा लाभ उपलब्ध कराना है।
वहीं, OPS की बहाली की मांग कर्मचारी संगठनों की ओर से जारी रह सकती है। लेकिन वर्तमान स्थिति में केंद्र सरकार ने OPS को वापस लाने का कोई प्रस्ताव स्वीकार या विचाराधीन होने की बात नहीं कही है।
इसलिए कर्मचारियों को अपनी पेंशन योजना से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए आधिकारिक नियमों और अपने विभाग से प्राप्त जानकारी को ही अंतिम मानना चाहिए।
OPS, NPS और UPS में मुख्य अंतर
| व्यवस्था | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| OPS | निर्धारित पेंशन वाली पुरानी व्यवस्था |
| NPS | कर्मचारी और सरकार के योगदान पर आधारित पेंशन व्यवस्था |
| UPS | NPS के तहत विकल्प, महंगाई से जुड़ा सुनिश्चित लाभ |
| UPS न्यूनतम सुनिश्चित भुगतान | पात्र शर्तों के अधीन ₹10,000 प्रति माह |
| केंद्रीय कर्मचारियों का NPS AUM | 26 जुलाई 2026 को ₹3.65 लाख करोड़ |
निष्कर्ष
OPS Restoration Latest Update: केंद्र सरकार ने संसद में साफ कर दिया है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने OPS से जुड़े लंबे समय के वित्तीय बोझ को इसका प्रमुख कारण बताया है।
सरकार ने साथ ही बताया कि NPS में सुधार के लिए गठित समिति की प्रक्रिया के बाद UPS को 1 अप्रैल 2025 से NPS के तहत विकल्प के रूप में लागू किया जा चुका है। UPS में पात्र कर्मचारियों के लिए न्यूनतम ₹10,000 प्रति माह सुनिश्चित भुगतान का प्रावधान है।
वहीं राज्यों में OPS की बहाली को राज्य सरकारों का नीतिगत फैसला बताया गया है। हालांकि, NPS में जमा कॉर्पस को राज्यों को वापस करने के लिए मौजूदा PFRDA कानून और नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
इसलिए फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS वापसी की उम्मीद के बजाय NPS और UPS की मौजूदा व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। भविष्य में सरकार की नीति में कोई बदलाव होता है तो उसकी जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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