8th Pay Commission: कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA पर उठीं 3 बड़ी मांगें, 25% पर बेसिक सैलरी में मर्जर

8th Pay Commission: कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। इस बार कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) को लेकर तीन ऐसी मांगें उठाई हैं, जिनका असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जेब पर पड़ेगा। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई भत्ते में साल में केवल दो बार बढ़ोतरी करने के बजाय हर तीन महीने में बढ़ोतरी किया जाए। इसके अलावा आठवे वेतन में DA के 25 प्रतिशत होते ही उसे बेसिक सैलरी में जोड़ने और महंगाई भत्ते को इनकम टैक्स से पूरी तरह बाहर रखने की मांग भी की गई है।

खास बात यह है कि ये मांगें पहली बार नहीं उठी हैं। करीब 20 साल पहले भी छठे वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों ने इसी तरह के प्रस्ताव रखे थे। हालांकि, उस समय इन मांगों को मंजूरी नहीं मिल पाई थी। अब एक बार फिर 8वें वेतन आयोग के सामने ये मुद्दे पहुंच गए हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारी संगठनों की ये तीन मांगें क्या हैं और अगर भविष्य में इन्हें स्वीकार किया जाता है तो केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या फायदा मिल सकता है।

8th Pay Commission मे DA और DR में हर तीन महीने में बढ़ोतरी की मांग

केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी DA और पेंशनर्स को महंगाई राहत यानी DR दिया जाता है। इसका मकसद बढ़ती महंगाई के कारण होने वाले अतिरिक्त खर्च से कुछ राहत देना है। फिलहाल केंद्र सरकार साल में दो बार DA और DR में बदलाव करती है। आमतौर पर ये बदलाव जनवरी और जुलाई से लागू होते हैं। लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के समय में महंगाई तेजी से बदलती है। ऐसे में छह महीने तक इंतजार करने के बजाय हर तीन महीने में DA और DR की समीक्षा होनी चाहिए।

भारत पेंशनर्स समाज ने भी 8वें वेतन आयोग के सामने यह मांग रखी है। संगठन चाहता है कि पिछले तीन महीनों की महंगाई के औसत को आधार बनाकर DA और DR में हर तिमाही बदलाव किया जाए। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगाई से राहत मिलने में ज्यादा देरी नहीं होगी। अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो साल में दो बार के बजाय चार बार DA और DR में बदलाव का रास्ता खुल सकता है।

DA 25% होते ही बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग

कर्मचारी संगठनों की दूसरी बड़ी मांग महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मर्ज करने से जुड़ी है। अभी DA कर्मचारियों की बेसिक सैलरी से अलग मिलता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए तो इसे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाना चाहिए। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने यह मांग 8वें वेतन आयोग के सामने रखी है। इसे एक आसान उदाहरण से समझिए।

मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और उसे 25 प्रतिशत DA मिल रहा है।

बेसिक सैलरी: 30,000 रुपये

25% DA: 7,500 रुपये

बेसिक और DA मिलाकर: 37,500 रुपये

कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि DA के 25 प्रतिशत होने पर 7,500 रुपये को बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाए।
हालांकि, वास्तविक वेतन में इसका असर किस तरह पड़ेगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार द्वारा तय किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा। इस मांग के पीछे कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में जोड़ने से भविष्य में वेतन से जुड़े दूसरे लाभों का आधार भी बढ़ सकता है।

DA और दूसरे भत्तों पर इनकम टैक्स छूट की मांग

तीसरी मांग कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काफी अहम है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि DA का उद्देश्य महंगाई के कारण बढ़ने वाले खर्च की भरपाई करना है। ऐसे में इस राशि पर इनकम टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए। FNPO ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि महंगाई भत्ते को पूरी तरह टैक्स से छूट दी जाए।

इसके साथ ही HRA यानी मकान किराया भत्ता और ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर भी पूरी टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है। संगठन का मानना है कि कर्मचारियों को ये भत्ते अतिरिक्त कमाई के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए दिए जाते हैं। अगर भविष्य में इस मांग को स्वीकार किया जाता है तो कर्मचारियों की टैक्स देनदारी कम हो सकती है और उनकी हाथ में आने वाली सैलरी पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल DA और इन भत्तों पर ऐसी कोई नई टैक्स छूट लागू नहीं हुई है।

20 साल पहले भी उठी थीं ये मांगें, लेकिन नहीं मिली थी मंजूरी

इन तीनों मांगों का इतिहास काफी पुराना है। छठे वेतन आयोग के समय भी कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ते को लेकर इसी तरह के प्रस्ताव रखे थे। उस समय DA में हर तीन महीने में बदलाव, DA को बेसिक सैलरी में जोड़ने और महंगाई भत्ते पर टैक्स छूट देने जैसे मुद्दे उठाए गए थे। लेकिन छठे वेतन आयोग ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद सातवें वेतन आयोग के दौरान भी इन मांगों पर कोई अलग सिफारिश नहीं की गई।

अब करीब दो दशक बाद कर्मचारी संगठनों ने इन्हीं मुद्दों को एक बार फिर 8वें वेतन आयोग के सामने रखा है। यही वजह है कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई हैं।

8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या उम्मीद?

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई इन तीनों मांगों का सीधा संबंध कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स की आर्थिक राहत से है। अगर इन प्रस्तावों पर सकारात्मक फैसला होता है तो भविष्य में कर्मचारियों और पेंशनर्स को कई तरह से फायदा मिल सकता है।

1) हर तीन महीने में DA और DR में बदलाव होने से महंगाई के अनुसार राहत जल्दी मिल सकती है।

2) DA को 25 प्रतिशत पर बेसिक सैलरी में जोड़ने से वेतन की गणना के आधार पर असर पड़ सकता है।

3) DA पर टैक्स छूट मिलने से कर्मचारियों की टैक्स देनदारी कम हो सकती है।

4) पेंशनर्स को भी DR के तिमाही संशोधन और बेसिक पेंशन में मर्जर से लाभ मिल सकता है, यदि संबंधित प्रस्ताव स्वीकार किए जाते हैं।

हालांकि, इन सभी फायदों के लिए आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।

फिलहाल कर्मचारियों को क्या समझना चाहिए?

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह खबर जरूर महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है। DA में हर तीन महीने में बढ़ोतरी, 25 प्रतिशत पर DA का बेसिक सैलरी में मर्जर और DA पर पूरी टैक्स छूट अभी केवल कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं।

8वें वेतन आयोग ने इन मांगों को मंजूरी दे दी है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा। आयोग इन प्रस्तावों की समीक्षा करेगा और अपनी रिपोर्ट में क्या सिफारिश करता है, यह आगे पता चलेगा। इसके बाद केंद्र सरकार अंतिम फैसला लेगी। इसलिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए।

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