8th Pay Commission: रेलवे कर्मचारियों के लिए AIRF ने रखीं बड़ी मांगें, न्यूनतम वेतन और भत्तों पर दिया जोर

8वें वेतन आयोग से देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और रेलवे कर्मचारियों को काफी उम्मीदें हैं। इसी बीच ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) ने रेलवे कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे 8वें वेतन आयोग के सामने रखे हैं। इनमें न्यूनतम वेतन, विशेष भत्ते, जोखिम भत्ता, ट्रैक मेंटेनर्स के वेतनमान और टेक्नीशियनों के प्रमोशन जैसे मुद्दे शामिल हैं।

AIRF की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें रखीं। इस बैठक में आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, सदस्य प्रो. पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन मौजूद थे।

रेलवे कर्मचारियों के लिए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें अलग-अलग विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं और उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

8वें वेतन आयोग के सामने AIRF ने कितनी देर तक रखी अपनी बात?

AIRF के पत्र के अनुसार, 8वें वेतन आयोग ने फेडरेशन को अपनी बात रखने के लिए कुल दो घंटे का समय दिया था। बैठक सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चली।

इस दौरान चर्चा को चार हिस्सों में बांटा गया था।

पहले आधे घंटे में न्यूनतम वेतन, रेलवे से जुड़े सामान्य मुद्दों और विशेष भत्तों पर चर्चा हुई।

दूसरे आधे घंटे में लोको और ट्रैफिक रनिंग स्टाफ से जुड़े मुद्दे उठाए गए।

तीसरे आधे घंटे में ट्रैक मेंटेनर्स और पी.वे (P.Way) कर्मचारियों की समस्याओं पर बात हुई।

आखिरी आधे घंटे में रेलवे के अलग-अलग विभागों के टेक्नीशियनों से जुड़े मुद्दे आयोग के सामने रखे गए।

1. रेलवे कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन और भत्तों पर उठाई मांग

AIRF ने 8वें वेतन आयोग को बताया कि रेलवे का काम दूसरे सरकारी विभागों से अलग है। रेलवे कर्मचारियों को सालभर 24 घंटे और हर तरह के मौसम में अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं।

रेलवे का संचालन लगातार जारी रहता है। प्राकृतिक आपदाओं और कठिन परिस्थितियों में भी रेलवे कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।

फेडरेशन ने रेलवे को भारतीय सेना के बाद देश की दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में बताया। संगठन का कहना है कि रेलवे कर्मचारियों के काम की जिम्मेदारियों और कठिन परिस्थितियों को देखते हुए उनके वेतन और सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

2. सभी रेलवे कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों की मांग

AIRF ने रेलवे कर्मचारियों के काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और गंभीर चोटों का मुद्दा भी आयोग के सामने उठाया।

फेडरेशन ने कहा कि रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों को कई बार जोखिम भरी परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी करनी पड़ती है। इसलिए सभी श्रेणियों के रेलवे कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों पर विचार किया जाना चाहिए।

इसमें मुख्य रूप से चार भत्तों की मांग रखी गई है।

  • Risk & Hardship Allowance (जोखिम और कठिन काम का भत्ता)
  • Hazardous Duty Allowance (खतरनाक काम का भत्ता)
  • Hill Allowance (पहाड़ी क्षेत्र में काम करने का भत्ता)
  • Dress Allowance (वर्दी का भत्ता)

AIRF का कहना है कि रेलवे कर्मचारियों की नौकरी में मौजूद जोखिम और कठिनाइयों को देखते हुए इन भत्तों की जरूरत है।

3. ट्रैक मेंटेनर्स, पेट्रोलमैन और कीमैन के लिए विशेष मांग

रेलवे ट्रैक की देखभाल करने वाले ट्रैक मेंटेनर्स का काम काफी जिम्मेदारी वाला होता है। उन्हें रेलवे ट्रैक के रखरखाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम करने पड़ते हैं।

AIRF ने आयोग को बताया कि ट्रैक मेंटेनर्स का काम कठिन और जोखिम भरा है। इसके लिए तकनीकी जानकारी और अनुभव की भी जरूरत होती है।

फेडरेशन ने मांग की कि ट्रैक मेंटेनर्स को भारतीय रेलवे के दूसरे इंजीनियरिंग विभागों के टेक्नीशियनों के बराबर वेतनमान में रखने पर विचार किया जाए।

इसके अलावा सिविल इंजीनियरिंग विभाग के निम्न कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों की मांग भी की गई है।

  • ट्रैक मेंटेनर्स
  • पेट्रोलमैन
  • कीमैन
  • गेटमैन

4. रेलवे टेक्नीशियनों के वेतनमान और प्रमोशन में सुधार की मांग

AIRF ने रेलवे के इंजीनियरिंग विभागों में काम करने वाले टेक्नीशियनों का मुद्दा भी विस्तार से उठाया।

फेडरेशन की मांग है कि टेक्नीशियनों को बेहतर वेतनमान दिया जाए और उनके प्रमोशन के अवसरों में सुधार किया जाए।

इसके साथ ही कुछ बीच के वेतनमानों को मिलाकर एक वेतनमान बनाने की मांग भी रखी गई है, ताकि कर्मचारियों को आगे बढ़ने और प्रमोशन पाने के बेहतर अवसर मिल सकें।

टेक्नीशियनों के लिए पर्याप्त Risk & Hardship Allowance और Dress Allowance देने की मांग भी आयोग के सामने रखी गई।

महिला रेलवे कर्मचारियों की समस्याएं भी आयोग के सामने रखीं

इस बैठक में महिला रेलवे कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

AIRF की महिला प्रतिनिधियों अशिमा और डॉली कुमारी ने महिला लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर और ट्रैक मेंटेनर्स की समस्याओं को आयोग के सामने रखा।

फेडरेशन के पत्र में बताया गया है कि महिला प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं और काम के दौरान आने वाली परेशानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

क्या 8वें वेतन आयोग ने रेलवे कर्मचारियों की मांगों को मंजूरी दे दी है?

रेलवे कर्मचारियों के लिए यह जानना जरूरी है कि AIRF ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगें जरूर रखी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन मांगों को मंजूरी मिल गई है।

30 अक्टूबर 2026 को जारी AIRF के पत्र में बैठक और मांगों की जानकारी दी गई है। इसमें कहीं भी यह नहीं बताया गया है कि आयोग ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने, विशेष भत्ते देने या वेतनमान में बदलाव करने का फैसला कर लिया है।

फेडरेशन ने बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया है। संगठन को उम्मीद है कि आयोग रेलवे कर्मचारियों की मांगों और उनके काम की कठिन परिस्थितियों को गंभीरता से ध्यान में रखेगा।

रेलवे कर्मचारियों को अब 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद?

AIRF ने इस बैठक में केवल वेतन बढ़ाने की बात नहीं रखी, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के काम की परिस्थितियों, जोखिम, विशेष भत्तों और प्रमोशन से जुड़े मुद्दों को भी उठाया है।

अब रेलवे कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग की आगे की प्रक्रिया पर रहेगी। देखना होगा कि आयोग अपनी सिफारिशों में AIRF की इन मांगों को कितना महत्व देता है।

निष्कर्ष: 8वें वेतन आयोग के सामने AIRF ने रेलवे कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन, विशेष भत्तों, ट्रैक मेंटेनर्स, पेट्रोलमैन, कीमैन, गेटमैन और टेक्नीशियनों से जुड़ी कई मांगें रखी हैं। महिला कर्मचारियों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, अभी इन मांगों पर मंजूरी मिलने की कोई आधिकारिक जानकारी इस पत्र में नहीं दी गई है।

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