8th Pay Commission: पेंशनर्स की 5 बड़ी मांगें, पेंशन बढ़ोतरी से लेकर OPS बहाली तक की मांग

8th Pay Commission Pensioners Demand: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। वेतन और भत्तों में बदलाव के अलावा पेंशनर्स संगठन लंबे समय से पेंशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे आयोग के सामने उठा रहे हैं। इनमें पेंशन में बढ़ोतरी, पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, पेंशन में समानता, कम्यूटेशन की अवधि घटाने और चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने जैसी मांगें शामिल हैं।

खास बात यह है कि इन मांगों में से कई मांगें अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के ज्ञापन में शामिल हैं। इसलिए इन्हें अभी सरकार की ओर से मंजूर फैसला नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम लाभ आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।

पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?

आठवें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी-अपनी मांगें रखी हैं। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी NC-JCM की ओर से भी पेंशनर्स के हित में कई मांगें रखी गई हैं। इनमें समान फिटमेंट फैक्टर, पेंशन में संशोधन, वन रैंक वन पेंशन, ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं।

वहीं भारत पेंशनर्स समाज ने भी न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 45,000 रुपये करने, पेंशन को अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत तक करने और फैमिली पेंशन को 50 प्रतिशत करने जैसी मांगें आयोग के सामने रखी हैं।

पहली मांग: पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी और समान फिटमेंट फैक्टर

पेंशनर्स की सबसे बड़ी उम्मीद आठवें वेतन आयोग से पेंशन के पुनरीक्षण को लेकर है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए।

NC-JCM से जुड़ी मांगों में 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की मांग शामिल है। साथ ही पेंशनर्स के लिए 1 जनवरी 2026 से एरियर देने की मांग भी रखी गई है। हालांकि यह अभी मांग है और सरकार ने इस पर अंतिम फैसला नहीं किया है।

अगर भविष्य में सरकार किसी फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है तो पेंशनर्स की बेसिक पेंशन में भी बदलाव हो सकता है। इसके बाद महंगाई राहत यानी DR की गणना भी संशोधित बेसिक पेंशन के आधार पर होने की संभावना होगी।

दूसरी मांग: पुराने और नए पेंशनर्स में समानता

पेंशनर्स संगठनों की एक महत्वपूर्ण मांग पेंशन में समानता को लेकर है। उनका कहना है कि एक ही पद और समान सेवा अवधि से रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में केवल रिटायरमेंट की तारीख के कारण बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए।

भारत पेंशनर्स समाज ने 1 जनवरी 2026 से पहले और उसके बाद रिटायर होने वाले पेंशनर्स के बीच उचित समानता की मांग की है। इसके अलावा पेंशन और वेतन के पुनरीक्षण को हर पांच साल में करने की मांग भी सामने आई है।

इस मांग का उद्देश्य यह है कि पुराने पेंशनर्स को भी समय के साथ बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत का लाभ मिल सके।

तीसरी मांग: पुरानी पेंशन योजना की बहाली

OPS यानी पुरानी पेंशन योजना की मांग भी आठवें वेतन आयोग से जुड़ी चर्चाओं में प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। NC-JCM ने NPS और UPS को वापस लेकर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है।

पुरानी पेंशन व्यवस्था में रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलने का प्रावधान रहा है, जबकि NPS में पेंशन का ढांचा अलग है और इसमें कर्मचारी के योगदान तथा निवेश से जुड़ी व्यवस्था होती है। UPS को भी केंद्र सरकार ने अलग पेंशन विकल्प के रूप में लागू किया है।

OPS की बहाली की मांग केवल केंद्रीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन समय-समय पर इसे लेकर अपनी मांग सरकार के सामने रखते रहे हैं। हालांकि आठवें वेतन आयोग के स्तर पर रखी गई मांग को मंजूरी मिलना अलग विषय है और इस पर अंतिम निर्णय सरकार को ही लेना होगा।

चौथी मांग: ग्रेच्युटी और कम्यूटेड पेंशन में बदलाव

पेंशनर्स संगठनों ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाने की मांग भी रखी है। NC-JCM से जुड़ी मांग में अधिकतम ग्रेच्युटी को 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई और मौजूदा वेतन स्तर को प्रमुख कारण बताया गया है।

इसके अलावा कम्यूटेड पेंशन की बहाली की अवधि कम करने की मांग भी सामने आई है। भारत पेंशनर्स समाज ने 60 वर्ष की उम्र में रिटायर होने वाले कर्मचारियों के मामले में कम्यूटेड पेंशन को 11 वर्ष बाद या 71 वर्ष की उम्र में, जो पहले हो, बहाल करने का प्रस्ताव रखा है।

वर्तमान व्यवस्था में कम्यूटेड पेंशन की बहाली को लेकर पेंशनर्स लंबे समय से बदलाव की मांग करते रहे हैं।

पांचवीं मांग: स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार

रिटायरमेंट के बाद पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ा खर्च अक्सर स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। इसी कारण पेंशनर संगठनों ने CGHS और कैशलेस इलाज की सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है।

भारत पेंशनर्स समाज ने CGHS व्यवस्था के विस्तार, कैशलेस उपचार की सुविधा बढ़ाने और ऐसे क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुरक्षा की मांग की है जहां CGHS की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही पात्र पेंशनर्स के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

पेंशनर्स का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ चिकित्सा खर्च लगातार बढ़ता है। ऐसे में केवल पेंशन में वृद्धि ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इलाज की सुविधा भी आसान और सस्ती होनी चाहिए।

न्यूनतम पेंशन 45 हजार रुपये करने की मांग

आठवें वेतन आयोग के सामने कुछ पेंशनर संगठनों ने न्यूनतम पेंशन को 45,000 रुपये करने की मांग भी रखी है। इसके साथ अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत के बराबर पेंशन और फैमिली पेंशन को 50 प्रतिशत करने का प्रस्ताव सामने आया है।

यदि ऐसी मांगें स्वीकार की जाती हैं तो न्यूनतम पेंशन पाने वाले पेंशनर्स को काफी बड़ा लाभ मिल सकता है। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि 45,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन फिलहाल एक मांग है, सरकार द्वारा घोषित नई न्यूनतम पेंशन नहीं।

8वें वेतन आयोग पर अभी क्या स्थिति है?

आठवें वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी चल रही है और आयोग अलग-अलग हितधारकों से सुझाव और मांगें सुन रहा है। कर्मचारी और पेंशनर संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रख चुके हैं और आगे की प्रक्रिया में इन सुझावों पर विचार किया जाएगा।

इसलिए सोशल मीडिया या कुछ वेबसाइटों पर चल रही उन खबरों से सावधान रहना चाहिए जिनमें किसी मांग को सीधे मंजूर फैसला बताया जा रहा है। जब तक सरकार या संबंधित मंत्रालय की ओर से आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम पेंशन, OPS बहाली या पेंशन में किसी निश्चित प्रतिशत बढ़ोतरी को अंतिम नहीं माना जा सकता।

पेंशनर्स के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?

आने वाले समय में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें सबसे महत्वपूर्ण होंगी। इसके बाद सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार करने, उनमें बदलाव करने या अलग निर्णय लेने पर विचार करेगी।

पेंशनर्स के लिए खास तौर पर फिटमेंट फैक्टर, पेंशन संशोधन, महंगाई राहत, न्यूनतम पेंशन, फैमिली पेंशन, कम्यूटेशन और मेडिकल सुविधाओं से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण रहेंगे।

कुल मिलाकर आठवें वेतन आयोग से पेंशनर्स को काफी उम्मीदें हैं। कई संगठन चाहते हैं कि बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए पेंशन व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाए। हालांकि अभी इन सभी मांगों पर अंतिम फैसला बाकी है। इसलिए पेंशनर्स को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए और किसी भी वायरल खबर को सरकारी आदेश के बिना अंतिम फैसला नहीं मानना चाहिए।

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