पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग: CAPF के रिटायर्ड जवानों ने उठाई आवाज, शहीद परिवारों को 1 करोड़ रुपये देने की मांग

देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी CAPF के सेवानिवृत्त जवानों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग उठाई है। जम्मू में रिटायर्ड CAPF वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने पत्रकारवार्ता करके पेंशन, पदोन्नति और जवानों के कल्याण से जुड़े कई मुद्दे सामने रखे।

एसोसिएशन ने मांग की कि CAPF कर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले जवानों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे कर्मियों की समस्याओं को दूर करने की मांग भी की गई।

यह मांग ऐसे समय उठी है, जब देशभर में सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था को लेकर चर्चा जारी है। हालांकि, इन मांगों को सरकार की ओर से मंजूरी मिलने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

CAPF के रिटायर्ड जवानों ने OPS बहाली की मांग क्यों की?

CAPF में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) जैसे बल शामिल हैं। इन बलों के जवान सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में तैनात रहते हैं।

जम्मू में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि जवान अपने जीवन के कई साल देश की सुरक्षा में लगा देते हैं। कई बार उन्हें परिवार से दूर कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा मिलना भी जरूरी है।

एसोसिएशन का कहना है कि पेंशन रिटायरमेंट के बाद आय का महत्वपूर्ण साधन होती है। इसलिए CAPF कर्मियों के लिए भी ऐसी पेंशन व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को भविष्य की आर्थिक चिंता कम हो।

संगठन ने सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने पर विचार करने की मांग की है। फिलहाल यह एसोसिएशन की मांग है, कोई स्वीकृत सरकारी फैसला नहीं।

पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन व्यवस्था में क्या अंतर है?

पुरानी पेंशन योजना यानी OPS और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी NPS की व्यवस्था अलग-अलग है।

पुरानी पेंशन योजना में पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन मिलती है। वहीं, NPS में कर्मचारी और सरकार का योगदान जमा होता है तथा रिटायरमेंट के समय मिलने वाला लाभ योजना के नियमों और निवेश से जुड़ा होता है।

NPS के तहत मिलने वाली राशि और पेंशन कर्मचारी के योगदान, निवेश के प्रदर्शन और निकासी के समय लागू नियमों पर निर्भर कर सकती है। इसी कारण कुछ कर्मचारी संगठन OPS को अधिक निश्चित पेंशन वाली व्यवस्था मानते हुए इसे दोबारा लागू करने की मांग करते हैं।

हालांकि, किसी कर्मचारी पर कौन-सी पेंशन व्यवस्था लागू होती है, यह उसकी नियुक्ति की तारीख, सेवा की श्रेणी और संबंधित सरकारी नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए सभी कर्मचारियों को एक ही नियम के अंतर्गत मानना सही नहीं होगा।

CAPF के रिटायर्ड कर्मियों की मांग है कि सरकार उनकी सेवा और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए पेंशन के मुद्दे पर फैसला करे।

शहीद जवानों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये देने की मांग

पत्रकारवार्ता में एसोसिएशन ने ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले CAPF जवानों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठाई।

संगठन के सदस्यों का कहना है कि देश की सुरक्षा करते हुए जान गंवाने वाले जवानों के परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। जवान की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक कठिनाइयों के साथ-साथ कई दूसरी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

एसोसिएशन ने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि शहीद परिवारों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए, जिससे वे भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकें।

यहां ध्यान देना जरूरी है कि एक करोड़ रुपये की राशि एसोसिएशन की मांग है। इसे सभी CAPF जवानों के परिवारों के लिए सरकार द्वारा घोषित नई सहायता राशि नहीं समझना चाहिए। वास्तविक मुआवजा और अन्य लाभ संबंधित नियमों तथा सरकारी आदेशों के अनुसार तय होते हैं।

15 से 16 साल तक पदोन्नति नहीं मिलने की शिकायत

CAPF कर्मियों की एक बड़ी समस्या पदोन्नति में देरी भी बताई गई है। एसोसिएशन के सदस्यों के अनुसार, बलों में सिपाही से लेकर सब-इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य पदों पर काम करने वाले कर्मियों को लंबे समय तक पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पाते।

रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने कुछ पदों पर 15 से 16 साल तक पदोन्नति में रुकावट की बात कही। एसोसिएशन ने मांग की कि कर्मियों को समयबद्ध पदोन्नति देने की व्यवस्था की जाए, ताकि वे लंबे समय तक एक ही पद पर न रहें।

पदोन्नति का सीधा संबंध कर्मचारी के करियर, वेतन और सेवा में आगे बढ़ने के अवसरों से होता है। लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों में निराशा पैदा हो सकती है।

एसोसिएशन ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस समस्या का समाधान करने की मांग की है।

दूरदराज क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने की मांग

CAPF जवानों की तैनाती कई बार ऐसे इलाकों में होती है, जहां सामान्य चिकित्सा सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दूरदराज क्षेत्रों में तैनात जवानों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

एसोसिएशन ने ऐसे क्षेत्रों में जवानों के कल्याण के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन का कहना है कि दूरस्थ इलाकों में पूरी सुविधाओं वाली डिस्पेंसरी और अस्पताल होने चाहिए, ताकि जवानों को समय पर इलाज मिल सके।

सेवा के दौरान चिकित्सा सुविधाएं और रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सुरक्षा, दोनों ही जवानों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।

क्या सरकार ने पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी है?

इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि CAPF के रिटायर्ड जवानों ने OPS बहाली की मांग की है, लेकिन मांग उठने का मतलब योजना लागू होना नहीं है।

पुरानी पेंशन योजना को लेकर सरकार का कोई नया आदेश जारी होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि किन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और कौन-से नियम लागू होंगे। जब तक आधिकारिक अधिसूचना नहीं आती, तब तक OPS बहाली की खबर को मंजूर फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

CAPF कर्मियों की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह सरकार और संबंधित विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

जम्मू में रिटायर्ड CAPF वेलफेयर एसोसिएशन ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शहीद जवानों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता देने, पदोन्नति में देरी दूर करने और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

इन मांगों का उद्देश्य सेवानिवृत्त जवानों और उनके परिवारों को बेहतर आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा दिलाना है। फिलहाल इन मांगों पर सरकार की ओर से किसी नई मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए CAPF कर्मियों और पेंशनर्स को आगे की जानकारी के लिए आधिकारिक आदेशों का इंतजार करना चाहिए।

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