CGHS लाभार्थियों के लिए बड़ी खबर: अस्पतालों को जारी हुए सख्त निर्देश, इलाज में देरी और अतिरिक्त शुल्क पर रोक

केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना यानी CGHS के लाभार्थियों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए अपर निदेशक कार्यालय, CGHS पुणे की ओर से 23 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है। इसमें CGHS से जुड़े सभी सूचीबद्ध अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को मरीजों के इलाज से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

CGHS मरीजों के साथ भेदभाव नहीं

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि CGHS लाभार्थियों के साथ कंसल्टेशन, जांच, भर्ती, उपचार या किसी अन्य कवर की गई सेवा में भेदभाव नहीं किया जा सकता।

अस्पतालों को CGHS के नियमों, पैकेज दरों और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

इमरजेंसी में तुरंत इलाज देना होगा

आपातकालीन स्थिति में CGHS लाभार्थी का इलाज तुरंत किया जाना चाहिए। केवल प्रशासनिक या कागजी औपचारिकताओं के कारण इमरजेंसी उपचार को रोका या टाला नहीं जा सकता।

अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर रोक

CGHS के तहत कवर सेवाओं के लिए मरीज से एडवांस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, रजिस्ट्रेशन फीस, फाइल चार्ज, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज या अन्य अनुचित शुल्क नहीं लिया जा सकता।

CGHS कार्ड की फोटो कॉपी पर जोर नहीं

अस्पताल CGHS लाभार्थी से अनिवार्य रूप से फिजिकल CGHS कार्ड या उसकी फोटो कॉपी देने पर जोर नहीं दे सकते।

दवाएं और मेडिकल सामान अस्पताल को देना होगा

यदि दवाएं, सर्जिकल सामान या अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स स्वीकृत CGHS पैकेज में शामिल हैं, तो उन्हें अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। मरीज को ऐसे सामान बाहर से खरीदने के लिए नहीं कहा जा सकता।

पैकेज में शामिल सामान का अलग बिल नहीं

CGHS की स्वीकृत पैकेज दरों का पालन करना होगा। किसी पैकेज में शामिल सामान या सेवाओं का अलग से बिल नहीं बनाया जा सकता।

मरीज को जरूरी दस्तावेज बिना शुल्क देने होंगे

डिस्चार्ज समरी, जांच रिपोर्ट, डायग्नोस्टिक इमेज और CGHS नियमों के तहत जरूरी अन्य दस्तावेज लाभार्थी को बिना किसी अनुचित शुल्क के उपलब्ध कराने होंगे।

मेडिकल फिट होने पर समय पर डिस्चार्ज

यदि डॉक्टर द्वारा मरीज को डिस्चार्ज के लिए मेडिकल रूप से फिट घोषित कर दिया गया है, तो उसे अनावश्यक रूप से अस्पताल में नहीं रोका जा सकता। प्रशासनिक औपचारिकताओं के नाम पर डिस्चार्ज में बेवजह देरी नहीं की जानी चाहिए।

डिस्चार्ज की दवाओं के भी नियम

डिस्चार्ज के समय दी जाने वाली दवाएं लागू CGHS नियमों और निर्धारित सीमाओं के अनुसार होनी चाहिए। ऐसे आइटम को CGHS क्लेम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए जो नियमों के अनुसार स्वीकार्य नहीं हैं।

CGHS हेल्प डेस्क बनाना होगा

सभी सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों को उचित स्टाफ के साथ CGHS हेल्प डेस्क बनाए रखने और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। CGHS मरीजों से जुड़े कर्मचारियों को संबंधित प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।

मरीज से फीडबैक और जियो-टैग्ड फोटो

अस्पतालों को लाभार्थी से हस्ताक्षरित फीडबैक फॉर्म लेना होगा। इसके साथ अनिवार्य जियो-टैग्ड फोटोग्राफ भी NHA पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।

इन-पेशेंट पैकेज में अलग से शुल्क नहीं

ज्ञापन में कुछ उदाहरण देते हुए बताया गया है कि इन-पेशेंट पैकेज में शामिल सामान और सेवाओं के लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसमें विशेष बेड, डीवीटी प्रोफिलैक्सिस, सिरिंज इन्फ्यूजन पंप, मॉनिटर, ईसीजी लीड्स, पोर्टेबल उपकरण, आरटी फीडिंग, एनीमा, ड्यूटी डॉक्टर, डाइटीशियन, बार्बर, टॉयलेटरीज, सैनिटरी वाइप्स, मॉइस्चराइजर, बेडपैन और यूरो-बैग जैसे आइटम के उदाहरण दिए गए हैं।

अस्पतालों की जांच और ऑडिट

CGHS या अधिकृत एजेंसियों द्वारा निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच के दौरान सूचीबद्ध अस्पतालों को पूरा सहयोग करना होगा।

नियम तोड़ने पर कार्रवाई

यदि कोई अस्पताल CGHS के नियमों, स्वीकृत दरों या सूचीबद्धता की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो लागू नियमों के अनुसार रिकवरी, जुर्माना, निलंबन, पैनल से हटाने या अन्य कार्रवाई की जा सकती है।

पेंशनर्स और कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?

इस आदेश का मुख्य उद्देश्य CGHS लाभार्थियों को इलाज के दौरान होने वाली अनावश्यक परेशानी और अतिरिक्त शुल्क से बचाना है। खास तौर पर इमरजेंसी इलाज, पैकेज में शामिल सेवाएं, दवाएं, डिस्चार्ज दस्तावेज और अस्पताल द्वारा लिए जाने वाले शुल्क को लेकर निर्देश स्पष्ट किए गए हैं।

यह कार्यालय ज्ञापन 23 सितंबर 2026 को जारी किया गया है और सभी CGHS से सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों, संबंधित CGHS वेलनेस सेंटरों तथा कार्यालय रिकॉर्ड के लिए भेजा गया है।

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