EPFO Pension Hike को लेकर लाखों पेंशनर्स के लिए एक बार फिर उम्मीद बढ़ी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के तहत पेंशन पाने वाले कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय मजदूर संघ के बीच अक्टूबर 2026 में बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने सहित पेंशनर्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।
भारतीय मजदूर संघ की ओर से EPFO पेंशनर्स के लिए न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह करने और इसके ऊपर महंगाई भत्ता देने की मांग की गई है। हालांकि अभी यह ध्यान रखना जरूरी है कि 7,500 रुपये की पेंशन का फैसला लागू नहीं हुआ है। यह मजदूर संघ की मांग है और सरकार के साथ प्रस्तावित बैठक में इस पर चर्चा होनी है।
अक्टूबर में हो सकती है सरकार के साथ बैठक
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मजदूर संघ और केंद्र सरकार के बीच अक्टूबर महीने के मध्य में बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में EPFO के तहत पेंशन पाने वाले कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
भारतीय मजदूर संघ पंजाब के संगठन मंत्री निरंजन सिंह ने बताया कि संगठन ने केंद्र सरकार के सामने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की मांग रखी है। इसके साथ ही पेंशनर्स को महंगाई भत्ता यानी डीए देने की मांग भी की गई है।
पेंशनर्स लंबे समय से यह मांग करते रहे हैं कि मौजूदा न्यूनतम पेंशन महंगाई और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का मुद्दा लगातार सरकार के सामने उठाया जाता रहा है।
अभी कितनी है न्यूनतम EPFO पेंशन?
मौजूदा व्यवस्था के तहत EPS के अंतर्गत न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये है। यह न्यूनतम राशि सितंबर 2014 से लागू है और 2026 में भी इसमें बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसलिए सोशल मीडिया या दूसरी जगहों पर अगर 7,500 रुपये की न्यूनतम पेंशन लागू होने की खबर दिखाई देती है, तो उसे फिलहाल सरकार का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ की मांग पूरी होने पर न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़कर 7,500 रुपये हो सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार की मंजूरी और संबंधित नियमों में बदलाव जरूरी होगा।
₹7,500 पेंशन के साथ डीए की भी मांग
भारतीय मजदूर संघ की मांग सिर्फ न्यूनतम पेंशन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। संगठन ने 7,500 रुपये की न्यूनतम पेंशन के साथ महंगाई भत्ता देने की मांग भी रखी है।
मजदूर संघ का तर्क है कि अगर पेंशन को महंगाई भत्ते से जोड़ा जाता है तो समय के साथ महंगाई बढ़ने पर पेंशनर्स को कुछ अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
रिपोर्ट में संगठन की ओर से कहा गया है कि न्यूनतम पेंशन बढ़ने और महंगाई भत्ता मिलने के बाद पेंशनर्स को हर महीने पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिल सकती है। हालांकि वास्तविक राशि और डीए की व्यवस्था सरकार द्वारा फैसला लिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
40 लाख पेंशनर्स पर पड़ सकता है असर
EPFO की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग का असर बड़ी संख्या में पेंशनर्स पर पड़ सकता है। मई 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सदस्य एसपी तिवारी के हवाले से कहा गया था कि करीब 40 लाख पेंशनर्स न्यूनतम पेंशन बढ़ोतरी से लाभान्वित हो सकते हैं। उस समय 1,000 रुपये से 3,000 रुपये न्यूनतम पेंशन करने के प्रस्ताव की चर्चा हुई थी।
वहीं अब भारतीय मजदूर संघ की ओर से न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये करने की मांग सामने रखी गई है। ऐसे में अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक महत्वपूर्ण हो सकती है।
सरकार ने EPF वेतन सीमा भी बढ़ाई
EPFO से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण जानकारी हाल में सामने आई है। केंद्र सरकार ने EPFO की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने बताया कि वेतन सीमा बढ़ने से ज्यादा कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य निधि, पेंशन और बीमा से जुड़े लाभों तक पहुंच का दायरा बढ़ सकता है।
EPF की वेतन सीमा में यह बदलाव पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े व्यापक सुधारों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय मजदूर संघ लंबे समय से उठा रहा है पेंशन का मुद्दा
EPFO की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग नई नहीं है। भारतीय मजदूर संघ पहले भी सरकार के सामने इस मुद्दे को उठा चुका है। जनवरी 2026 में भी BMS ने श्रम एवं रोजगार मंत्री के सामने न्यूनतम पेंशन को मौजूदा 1,000 रुपये से काफी बढ़ाने की मांग रखी थी।
इससे पहले 2025 में भी BMS की ओर से EPS-95 की न्यूनतम पेंशन को पहले चरण में 5,000 रुपये करने और बाद में उसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग सामने आई थी।
इससे साफ है कि न्यूनतम EPFO पेंशन में बढ़ोतरी का मुद्दा मजदूर संगठनों के प्रमुख मुद्दों में बना हुआ है।
पेंशनर्स को आयुष्मान भारत का लाभ देने की भी मांग
भारतीय मजदूर संघ ने EPFO पेंशनर्स के लिए सिर्फ पेंशन बढ़ाने की मांग नहीं की है। संगठन ने सभी पेंशन धारकों को आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी रखी है।
बढ़ती उम्र में इलाज और दवाइयों का खर्च पेंशनर्स के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। ऐसे में संगठन का कहना है कि पेंशनर्स को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
क्या अक्टूबर में ₹7,500 पेंशन का फैसला हो जाएगा?
अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। अक्टूबर में सरकार और भारतीय मजदूर संघ के बीच प्रस्तावित बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की बात सामने आई है। बैठक के बाद सरकार का रुख और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है।
अगर सरकार न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को स्वीकार करती है तो इसके लिए संबंधित नियमों और पेंशन व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने होंगे। इसके बाद ही नई न्यूनतम पेंशन लागू मानी जाएगी।
इसलिए फिलहाल EPFO पेंशनर्स को ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन मिलने की खबर को अंतिम सरकारी फैसला नहीं मानना चाहिए।
पेंशनर्स की नजर अक्टूबर की बैठक पर
EPFO के लाखों पेंशनर्स के लिए अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न्यूनतम पेंशन, महंगाई भत्ता और पेंशनर्स की सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
फिलहाल न्यूनतम EPS पेंशन 1,000 रुपये है। भारतीय मजदूर संघ इसे बढ़ाकर 7,500 रुपये करने और इसके साथ महंगाई भत्ता देने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर सरकार की ओर से इस मांग को लेकर अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।
इसलिए अब सभी की नजर अक्टूबर में होने वाली प्रस्तावित बैठक और उसके बाद सरकार की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर रहेगी। यदि न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है, तो इसका सीधा लाभ पात्र EPS पेंशनर्स को मिल सकता है।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
माझ्या लेखांचा उद्देश लोकांना अचूक, योग्य आणि विश्वासार्ह माहिती उपलब्ध करून देणे हा आहे. मी नेहमी प्रयत्न करतो की माझ्या लेखनातील भाषा साधी-सोप्या स्वरूपाची असावी, माहिती उपयोगी असावी आणि वाचकांना कोणत्याही विषयाचे आकलन करण्यात अडचण येऊ नये.
