EPFO Report: हर दूसरा EPS पेंशनर 1000 रुपये से कम मासिक पेंशन पर निर्भर, सामाजिक सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

देश में बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) से जुड़े लाखों पेंशनरों की आर्थिक स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में बड़ी संख्या में EPS पेंशनर आज भी बेहद कम पेंशन पर जीवनयापन करने को मजबूर हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि लगभग हर दूसरा पेंशनर 1000 रुपये से भी कम मासिक पेंशन प्राप्त कर रहा है, जिससे सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

EPFO रिपोर्ट में क्या सामने आया?

EPFO की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार संगठन के पास लगभग 81.48 लाख पेंशनर पंजीकृत हैं। इनमें से 36.82 लाख पेंशनरों को हर महीने 1000 रुपये से कम पेंशन मिल रही है। इसका अर्थ है कि करीब 45 प्रतिशत से अधिक पेंशनर बेहद कम राशि में अपना गुजारा कर रहे हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि मृत कर्मचारियों के बच्चों को मिलने वाली औसत पेंशन मात्र 641 रुपये प्रति माह है, जो वर्तमान समय में जीवन-यापन की जरूरतों के मुकाबले बेहद कम मानी जा रही है।

औसत पेंशन कितनी मिल रही है?

EPFO के आंकड़ों के अनुसार—

  • लगभग 53.09 लाख सदस्य पेंशनरों को औसतन 2573 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है।
  • 21.32 लाख आश्रित पेंशनरों की औसत पेंशन लगभग 1740 रुपये प्रतिमाह है।
  • 6.10 लाख बाल पेंशनरों को औसतन 641 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अधिकांश लाभार्थियों को मिलने वाली पेंशन वर्तमान महंगाई के मुकाबले काफी कम है।

1500 रुपये मासिक पेंशन से कैसे चलेगा खर्च?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी बुजुर्ग को 1500 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, तो उसके पास प्रतिदिन खर्च के लिए लगभग 50 रुपये ही उपलब्ध होते हैं।

आज के समय में केवल दवाइयों पर ही कई बार 1000 से 3000 रुपये प्रति माह तक खर्च हो जाता है। इसके अलावा बिजली, पानी, रसोई गैस, राशन और अन्य घरेलू जरूरतों का मासिक खर्च अलग होता है। ऐसे में इतनी कम पेंशन से सम्मानजनक जीवनयापन करना बेहद कठिन माना जा रहा है।

पेंशन कम रहने के पीछे क्या हैं कारण?

विशेषज्ञों के अनुसार EPS पेंशन कम रहने के कई कारण हैं।

  • पेंशन की गणना सीमित वेतन सीमा के आधार पर होना।
  • महंगाई के अनुरूप नियमित संशोधन का अभाव।
  • EPS पेंशन पर महंगाई राहत (Dearness Relief) जैसी व्यवस्था लागू नहीं होना।
  • वर्षों से न्यूनतम पेंशन राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं होना।

इन्हीं कारणों से बड़ी संख्या में पेंशनरों की वास्तविक आय लगातार घटती जा रही है।

7500 रुपये न्यूनतम पेंशन की मांग फिर तेज

EPS-95 पेंशनर्स लंबे समय से न्यूनतम 7500 रुपये मासिक पेंशन, महंगाई भत्ता (DA/DR) तथा बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि वर्ष 2013 में गठित विशेषज्ञ समिति ने भी न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक उस पर व्यापक स्तर पर अमल नहीं हो पाया है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए अब यह मांग फिर से जोर पकड़ रही है।

आगे क्या हो सकता है?

EPS-95 पेंशन को लेकर विभिन्न पेंशनर्स संगठन लगातार सरकार के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं। आने वाले समय में यदि सरकार इस विषय पर कोई निर्णय लेती है तो इसका लाभ लाखों पेंशनरों को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार की आगामी घोषणाओं और संभावित सुधारों पर बनी हुई हैं।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट और सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। पेंशन से संबंधित किसी भी आधिकारिक निर्णय या बदलाव के लिए EPFO और भारत सरकार की आधिकारिक अधिसूचनाओं का इंतजार करना चाहिए।

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