जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS के दायरे में आने वाले कुछ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना यानी OPS में जाने का एक बार का मौका दिया है। हालांकि यह सुविधा सभी NPS कर्मचारियों के लिए नहीं है। इसका लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा, जो सरकार द्वारा तय की गई विशेष पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
इस फैसले के बाद उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया पुरानी पेंशन व्यवस्था के समय शुरू हुई थी, लेकिन किसी कारण से उनकी नियुक्ति और ज्वाइनिंग बाद में हुई। ऐसे कर्मचारियों को NPS के तहत रखा गया था। अब सरकार ने निर्धारित शर्तों के आधार पर उन्हें OPS चुनने का अवसर दिया है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा OPS चुनने का मौका?
जम्मू-कश्मीर सरकार के आदेश के मुताबिक यह विकल्प उन कर्मचारियों के लिए है, जिनके पद या वैकेंसी के लिए भर्ती का विज्ञापन या अधिसूचना 24 दिसंबर 2009 से पहले जारी हो चुकी थी। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी ने सरकारी सेवा में 1 जनवरी 2010 या उसके बाद ज्वाइन किया और उसे NPS के अंतर्गत रखा गया।
दरअसल, जम्मू-कश्मीर में 24 दिसंबर 2009 को SRO-400 के माध्यम से Defined Contribution Pension Scheme लागू करने का रास्ता तैयार हुआ था। इसके बाद 1 जनवरी 2010 से सेवा में आने वाले कर्मचारियों को नई पेंशन व्यवस्था के दायरे में रखा गया। ऐसे में उन कर्मचारियों का मामला अलग बन गया, जिनकी भर्ती की प्रक्रिया इससे पहले शुरू हो चुकी थी, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई।
28 दिसंबर 2026 तक करना होगा आवेदन
पात्र कर्मचारियों के लिए OPS का विकल्प चुनने की समयसीमा भी तय की गई है। संबंधित कर्मचारी 28 दिसंबर 2026 तक अपना विकल्प दे सकते हैं। यह एक वन-टाइम ऑप्शन है, यानी निर्धारित अवधि में निर्णय लेना जरूरी होगा।
जो कर्मचारी तय समयसीमा के भीतर OPS के लिए आवेदन नहीं करेंगे, वे NPS के अंतर्गत ही बने रहेंगे। इसलिए पात्र कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे अपने नियुक्ति रिकॉर्ड, भर्ती विज्ञापन और संबंधित विभागीय दस्तावेजों की जाँच कर लें।
OPS चुनने के बाद क्या होगा?
OPS का विकल्प स्वीकार होने के बाद कर्मचारी की पेंशन व्यवस्था में बदलाव होगा। मौजूदा NPS खाते को भी बंद करने की प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार की व्यवस्था के अनुसार जिस महीने कर्मचारी को OPS में शामिल करने का आदेश जारी किया जाएगा, उसके अगले महीने की पहली तारीख से उसका NPS खाता बंद किया जाएगा।
इसके बाद संबंधित कर्मचारी के लिए सामान्य भविष्य निधि यानी GPF की व्यवस्था लागू होगी। इसका मतलब यह है कि OPS का विकल्प चुनने का असर केवल भविष्य में मिलने वाली पेंशन पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग्स की व्यवस्था में भी बदलाव आएगा।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन व्यवस्था को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है। खासतौर पर उन कर्मचारियों का मामला अलग रहा है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया किसी पुरानी व्यवस्था के दौरान शुरू हुई, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई।
जम्मू-कश्मीर में भी कुछ कर्मचारी इसी तरह की स्थिति में थे। उनकी वैकेंसी का विज्ञापन या अधिसूचना NPS लागू होने से पहले जारी हो गई थी, लेकिन नियुक्ति और ज्वाइनिंग बाद में हुई। ऐसे कर्मचारियों को नई पेंशन व्यवस्था के तहत रखा गया था।
अब जम्मू-कश्मीर सरकार ने ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए पात्र कर्मचारियों को OPS चुनने का अवसर दिया है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अपने पुराने भर्ती रिकॉर्ड के आधार पर इस विकल्प के दायरे में आते हैं।
केंद्र के पुराने फैसले से भी जुड़ा है मामला
ऐसी स्थिति केवल जम्मू-कश्मीर में ही देखने को नहीं मिली है। केंद्र सरकार ने भी पहले कुछ ऐसे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान किया था, जिनकी भर्ती प्रक्रिया NPS लागू होने से पहले शुरू हुई थी, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई।
मार्च 2023 में केंद्र सरकार ने कुछ पात्र केंद्रीय कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत आने के लिए वन-टाइम विकल्प दिया था। हालांकि केंद्र के उस आदेश को जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों पर सीधे लागू नहीं माना गया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपने स्तर पर इस विषय पर निर्णय लिया।
किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?
जिन कर्मचारियों को लगता है कि वे इस विकल्प के लिए पात्र हैं, उन्हें अपने पुराने भर्ती रिकॉर्ड को ध्यान से देखना चाहिए। खास तौर पर भर्ती विज्ञापन या अधिसूचना की तारीख, नियुक्ति आदेश, ज्वाइनिंग की तारीख और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कर्मचारी को यह भी देखना चाहिए कि उसका पद या वैकेंसी वास्तव में निर्धारित कटऑफ तारीख से पहले विज्ञापित या अधिसूचित हुई थी या नहीं। केवल NPS के अंतर्गत होना अपने आप OPS के लिए पात्रता नहीं बनाता।
सभी NPS कर्मचारियों के लिए नहीं है यह सुविधा
इस फैसले को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे सभी NPS कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार ने इसे एक विशेष श्रेणी के कर्मचारियों तक सीमित रखा है।
यानी अगर किसी कर्मचारी की भर्ती और वैकेंसी दोनों ही निर्धारित तारीख के बाद की हैं, तो केवल NPS में होने के आधार पर उसे इस विकल्प का लाभ नहीं मिलेगा। पात्रता संबंधित भर्ती और नियुक्ति रिकॉर्ड के आधार पर तय होगी।
आवेदन से पहले नियमों को अच्छी तरह समझें
OPS का विकल्प एक बार इस्तेमाल करने के बाद इसे सामान्य रूप से वापस बदलने की सुविधा नहीं होगी। इसलिए पात्र कर्मचारी को आवेदन करने से पहले अपने विभाग से नियमों की पुष्टि करनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि OPS में जाने के बाद NPS खाते और GPF से जुड़ी प्रक्रिया किस तरह लागू होगी।
जम्मू-कश्मीर सरकार का यह फैसला फिलहाल उन कर्मचारियों के लिए है जो पुरानी तारीख में विज्ञापित या अधिसूचित पदों पर बाद में नियुक्त हुए और NPS के दायरे में आ गए। पात्र कर्मचारियों को 28 दिसंबर 2026 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर सरकार का यह निर्णय उन सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया NPS लागू होने से पहले शुरू हो गई थी, लेकिन उनकी ज्वाइनिंग बाद में हुई। सरकार ने ऐसे पात्र कर्मचारियों को OPS में जाने का एक मौका दिया है।
हालांकि इसका फायदा केवल निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले कर्मचारियों को ही मिलेगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने पुराने भर्ती दस्तावेजों की जाँच करने के साथ-साथ संबंधित विभाग से पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए। 28 दिसंबर 2026 तक विकल्प नहीं देने वाले पात्र कर्मचारी NPS में ही बने रहेंगे।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
माझ्या लेखांचा उद्देश लोकांना अचूक, योग्य आणि विश्वासार्ह माहिती उपलब्ध करून देणे हा आहे. मी नेहमी प्रयत्न करतो की माझ्या लेखनातील भाषा साधी-सोप्या स्वरूपाची असावी, माहिती उपयोगी असावी आणि वाचकांना कोणत्याही विषयाचे आकलन करण्यात अडचण येऊ नये.
