केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स के लिए कम्यूटेड पेंशन की बहाली से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मांग सामने आई है। भारत पेंशनर्स समाज यानी BPS ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग और पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग से कम्यूटेड पेंशन की मौजूदा 15 साल की बहाली अवधि की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है। BPS का कहना है कि वर्तमान आर्थिक और एक्चुरियल परिस्थितियों को देखते हुए इस अवधि पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए और कम्यूटेड पेंशन को 11 साल बाद बहाल करने की संभावना पर भी जांच होनी चाहिए।
यह मांग हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के 16 सितंबर 2026 के फैसले के बाद सामने आई है। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाई कोर्ट ने केंद्रीय कर्मचारियों की कम्यूटेड पेंशन को 11 साल में बहाल करने का आदेश नहीं दिया है और न ही केंद्र सरकार ने अभी 11 साल का नया नियम लागू किया है। फिलहाल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए कम्यूटेड पेंशन की बहाली का नियम 15 साल का ही है।
क्या है कम्यूटेड पेंशन?
रिटायरमेंट के समय सरकारी कर्मचारी अपनी पेंशन के एक हिस्से को कम्यूट यानी एकमुश्त राशि के रूप में ले सकता है। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के मामले में पेंशन के अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्से को कम्यूट करने का प्रावधान है।
इसके बदले कर्मचारी को एकमुश्त रकम मिलती है। लेकिन इसके बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन में कम्यूट किए गए हिस्से के बराबर कमी हो जाती है। मौजूदा नियम के अनुसार कम्यूट की गई पेंशन का यह हिस्सा 15 साल पूरे होने के बाद दोबारा बहाल किया जाता है।
उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी की पेंशन में से 40 प्रतिशत हिस्सा कम्यूट किया गया है, तो उसे रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त रकम मिलती है, लेकिन मासिक पेंशन कम हो जाती है। 15 साल पूरे होने के बाद कम्यूट किया गया हिस्सा वापस जुड़ जाता है और पेंशन फिर से पूरी हो जाती है।
15 साल की जगह 11 साल की मांग क्यों?
भारत पेंशनर्स समाज ने 21 सितंबर 2026 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की चेयरपर्सन और पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के सचिव को पत्र भेजकर इस मुद्दे पर नए सिरे से अध्ययन करने की मांग की है।
BPS का तर्क है कि जिस आधार पर कम्यूटेशन से जुड़े नियम और गणना की गई थी, उसमें पिछले वर्षों के दौरान काफी बदलाव आया है। ब्याज दर, आर्थिक परिस्थितियां, जीवन प्रत्याशा और मृत्यु दर जैसे एक्चुरियल मानकों में बदलाव को देखते हुए कम्यूटेशन व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।
BPS ने कहा है कि मौजूदा केंद्रीय कम्यूटेशन टेबल 1 जनवरी 2006 से लागू है, जबकि 15 साल की बहाली अवधि अभी भी जारी है। संगठन का मानना है कि इतने लंबे समय में आर्थिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों में बदलाव को ध्यान में रखते हुए इसकी समीक्षा जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले में क्या कहा गया?
इस पूरे मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का 16 सितंबर 2026 का फैसला महत्वपूर्ण है। मामला सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा कम्यूटेड पेंशन की राशि की वसूली और 15 साल बाद पूरी पेंशन बहाल करने से जुड़ा था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई थी कि कम्यूटेड राशि ब्याज सहित 10 से 12 साल के भीतर ही रिकवर हो जाती है, इसलिए पूरी पेंशन की बहाली के लिए 15 साल तक इंतजार क्यों किया जाए।
हाई कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था और उससे जुड़े एक्चुरियल पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए सरकार द्वारा इस विषय की तार्किक समीक्षा किए जाने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि अदालत ने खुद 15 साल की अवधि को घटाकर 11 साल करने का आदेश नहीं दिया।
यही वजह है कि BPS ने अब इस फैसले को आधार बनाकर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया है।
BPS की 5 प्रमुख मांगें
भारत पेंशनर्स समाज ने अपने प्रतिनिधित्व में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सबसे पहले 8वें वेतन आयोग से कम्यूटेशन टेबल और उससे जुड़े एक्चुरियल आधार की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की गई है।
इसके अलावा ब्याज और डिस्काउंट रेट, मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा और वास्तविक रिकवरी अवधि जैसे पहलुओं का अध्ययन करने को कहा गया है।
BPS ने मौजूदा 15 साल की बहाली अवधि की भी समीक्षा करने की मांग की है। संगठन ने तत्काल तौर पर कम्यूटेड पेंशन को 11 साल बाद बहाल करने की संभावना की जांच करने का सुझाव दिया है। अगर नए एक्चुरियल अध्ययन में इससे कम अवधि उचित साबित होती है, तो उस पर भी विचार करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही BPS ने एक विशेषज्ञ या एक्चुरियल कमेटी बनाने का सुझाव दिया है, जिसमें योग्य एक्चुरियल विशेषज्ञ, संबंधित मंत्रालयों, 8वें वेतन आयोग और पेंशनर्स संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हों।
अंत में संगठन ने कम्यूटेशन नियमों में आवश्यक संशोधन करने और कानूनी एवं प्रशासनिक रूप से संभव होने पर नए प्रावधानों का लाभ मौजूदा पेंशनर्स तक पहुंचाने पर भी विचार करने की मांग की है।
अगर 11 साल का नियम लागू हुआ तो क्या होगा?
अगर भविष्य में सरकार 11 साल में कम्यूटेड पेंशन बहाल करने का फैसला करती है, तो जिन पेंशनर्स ने अपनी पेंशन का हिस्सा कम्यूट कराया है, उन्हें मौजूदा व्यवस्था की तुलना में लगभग चार साल पहले कम्यूट किया गया हिस्सा वापस मिलने की संभावना होगी।
इसका सीधा असर उनकी मासिक पेंशन पर पड़ेगा। 15 साल पूरा होने तक जिस हिस्से की कटौती होती है, वह यदि 11 साल बाद बहाल कर दिया जाए तो पेंशनर को 12वें साल से पूरी पेंशन मिलने लगेगी।
लेकिन अभी ऐसा कोई लागू सरकारी आदेश नहीं आया है। इसलिए पेंशनर्स को 11 साल की बहाली को वर्तमान अधिकार मानकर नहीं चलना चाहिए।
क्या 8वें वेतन आयोग में फैसला हो सकता है?
BPS ने अपनी मांग सीधे 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सामने रखी है। अब इस मुद्दे पर आयोग द्वारा विचार और अध्ययन किया जाना बाकी है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को लेकर कोई बदलाव प्रस्तावित किया जाता है या नहीं।
इसलिए फिलहाल 11 साल की अवधि को पेंशनर्स की मांग के रूप में देखना सही होगा, न कि नए सरकारी नियम के रूप में।
पेंशनर्स के लिए अभी क्या नियम है?
वर्तमान में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए कम्यूटेड पेंशन की बहाली की अवधि 15 साल है। CCS Commutation of Pension Rules के तहत कम्यूट किया गया हिस्सा 15 साल पूरे होने के बाद बहाल किया जाता है।
इसलिए जिन पेंशनर्स की कम्यूटेड पेंशन अभी 15 साल पूरे नहीं होने के कारण बहाल नहीं हुई है, उनके लिए फिलहाल यही नियम लागू रहेगा।
निष्कर्ष
कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि घटाने की मांग ने 8वें वेतन आयोग के सामने पेंशनर्स का एक महत्वपूर्ण मुद्दा फिर से ला दिया है। भारत पेंशनर्स समाज ने मौजूदा 15 साल की अवधि की नई एक्चुरियल समीक्षा कराने और विशेष रूप से 11 साल बाद कम्यूटेड पेंशन बहाल करने की संभावना पर विचार करने की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का 16 सितंबर 2026 का फैसला इस मांग के लिए महत्वपूर्ण आधार बना है, लेकिन अदालत ने खुद केंद्रीय पेंशनर्स के लिए 11 साल की बहाली का आदेश नहीं दिया है। इसलिए अभी पेंशनर्स को 11 साल में कम्यूटेड पेंशन बहाली का इंतजार करने के बजाय सरकार और 8वें वेतन आयोग के आगे की प्रक्रिया पर नजर रखनी चाहिए।
महत्वपूर्ण: 11 साल में कम्यूटेड पेंशन की बहाली अभी लागू सरकारी नियम नहीं है। यह भारत पेंशनर्स समाज द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग और सरकार के सामने रखी गई मांग है।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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