सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते यानी DA को लेकर सितंबर 2026 में कई महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं। केंद्र सरकार के बाद कई राज्य सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के DA और DR में बढ़ोतरी की है। वहीं महाराष्ट्र के कर्मचारियों के लिए पुराना DA एरियर जारी करने को लेकर भी बड़ा फैसला हुआ है।
महाराष्ट्र सरकार ने पांचवें, छठे और सातवें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों के नवंबर और दिसंबर 2025 तथा जनवरी 2026 के DA एरियर के लिए करीब ₹800 करोड़ की राशि मंजूर की है। इसके अलावा राज्य में सेवानिवृत्त अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के महंगाई राहत यानी DR में भी बढ़ोतरी की गई है।
केंद्रीय कर्मचारियों का DA 60 प्रतिशत हुआ
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 2026 में DA में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों का DA 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी है।
DA मूल वेतन के आधार पर दिया जाता है। इसलिए DA का प्रतिशत बढ़ने के साथ कर्मचारियों की मासिक सैलरी में भी बढ़ोतरी होती है। इसी तरह पेंशनर्स के लिए DA की जगह महंगाई राहत यानी DR लागू होती है।
केंद्र के 60 प्रतिशत DA से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनर्स को लाभ मिलने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
महाराष्ट्र में ₹800 करोड़ का DA एरियर
महाराष्ट्र के सरकारी कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर DA एरियर से जुड़ी है। राज्य सरकार ने पांचवें, छठे और सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन पाने वाले कर्मचारियों के नवंबर 2025, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बकाया महंगाई भत्ते के भुगतान के लिए करीब ₹800 करोड़ मंजूर किए हैं।
इसका मतलब यह है कि जिन पात्र कर्मचारियों का इन महीनों का DA एरियर बाकी था, उन्हें अब उसका भुगतान किया जाना है। अलग-अलग वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए DA की गणना संबंधित वेतन संरचना के अनुसार होगी।
महाराष्ट्र में यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्मचारियों को लंबे समय से बकाया DA का इंतजार था। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाला एरियर एक जैसा नहीं होगा। यह उसके मूल वेतन, वेतन आयोग और संबंधित अवधि में लागू DA दर पर निर्भर करेगा।
महाराष्ट्र में DA 60 प्रतिशत हुआ
महाराष्ट्र सरकार ने सातवें वेतन आयोग के तहत आने वाले राज्य कर्मचारियों के लिए DA को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का आदेश अगस्त 2026 में जारी किया था। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू की गई है।
इसका सीधा असर कर्मचारियों के मासिक वेतन पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन ₹30,000 है, तो 58 प्रतिशत DA के हिसाब से DA ₹17,400 होता था। 60 प्रतिशत DA होने पर यह राशि ₹18,000 हो जाएगी।
यानी इस उदाहरण में DA के कारण ₹600 प्रति माह का अंतर पड़ेगा। वास्तविक लाभ कर्मचारी के वास्तविक मूल वेतन के अनुसार अलग-अलग होगा।
पेंशनर्स के लिए भी राहत
DA की तरह पेंशनर्स को महंगाई राहत यानी DR का लाभ मिलता है। महाराष्ट्र सरकार ने सेवानिवृत्त अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के DR में भी 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी मंजूर की है।
केंद्रीय और राज्य पेंशनर्स के मामले में यह समझना जरूरी है कि DR की दर और उसका भुगतान संबंधित सरकार के आदेशों के अनुसार होता है। इसलिए किसी राज्य में DA बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि देश के सभी राज्य पेंशनर्स की DR अपने आप उसी दर पर हो जाएगी।
इन राज्यों में भी DA में बढ़ोतरी
केंद्र के बाद कई राज्यों ने भी अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA या DR में बदलाव किया है। रिपोर्ट के अनुसार अरुणाचल प्रदेश और असम में DA में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करके इसे 60 प्रतिशत किया गया है।
ओडिशा, सिक्किम और तमिलनाडु में भी 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद DA 60 प्रतिशत तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश में भी DA को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया गया है। वहां लगभग 16 लाख कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनर्स को इसका लाभ मिलने की बात कही गई है।
बिहार में अलग-अलग वेतन आयोग के अनुसार DA की दरों में बदलाव किया गया है। सातवें वेतन आयोग के तहत DA 58 प्रतिशत से 60 प्रतिशत और छठे वेतन आयोग के तहत 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
पश्चिम बंगाल में अलग स्थिति
पश्चिम बंगाल में भी DA को लेकर बदलाव की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में DA में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है, जिसके बाद यह 38 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है।
इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग राज्यों में DA की दर एक जैसी नहीं है। प्रत्येक राज्य अपने वित्तीय निर्णय और सरकारी आदेश के अनुसार DA और DR में बदलाव करता है।
DA कैसे बढ़ता है?
महंगाई भत्ते का उद्देश्य बढ़ती महंगाई के असर को कम करना है। केंद्र सरकार के DA की गणना मुख्य रूप से औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर होती है।
केंद्र सरकार आम तौर पर साल में दो बार DA में संशोधन करती है। पहला संशोधन जनवरी से और दूसरा जुलाई से प्रभावी माना जाता है। हालांकि वास्तविक घोषणा बाद में हो सकती है और एरियर संबंधित प्रभावी तारीख से दिया जाता है।
इसी वजह से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब जुलाई 2026 वाले अगले DA संशोधन पर भी है। सितंबर 2026 में इसको लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं, लेकिन अगली बढ़ोतरी की अंतिम दर सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
8वें वेतन आयोग पर भी नजर
DA के साथ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर आठवें वेतन आयोग पर भी है। DA में बढ़ोतरी से मौजूदा वेतन और पेंशन में राहत मिलती है, जबकि वेतन आयोग के माध्यम से वेतन संरचना में व्यापक बदलाव हो सकता है।
हालांकि DA बढ़ोतरी और आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें दो अलग-अलग विषय हैं। इसलिए DA में बढ़ोतरी को आठवें वेतन आयोग की अंतिम वेतन वृद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कर्मचारियों और पेंशनर्स को क्या समझना चाहिए?
सितंबर 2026 तक सामने आई जानकारी से साफ है कि DA और DR को लेकर केंद्र तथा कई राज्यों में अलग-अलग फैसले हुए हैं। महाराष्ट्र में 60 प्रतिशत DA के साथ पुराने बकाये के भुगतान के लिए करीब ₹800 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। वहीं कई अन्य राज्यों ने भी DA को बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया है।
लेकिन हर कर्मचारी को मिलने वाली राशि अलग होगी। इसका हिसाब निकालने के लिए मूल वेतन, लागू DA प्रतिशत और एरियर की अवधि को देखना जरूरी है।
इसलिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपने विभाग की ओर से जारी सरकारी आदेश और वेतन पर्ची के आधार पर ही अंतिम राशि की जांच करनी चाहिए। खासकर महाराष्ट्र के कर्मचारियों के मामले में ₹800 करोड़ की कुल एरियर राशि को हर कर्मचारी का व्यक्तिगत एरियर नहीं समझना चाहिए। वास्तविक भुगतान कर्मचारी के वेतन और पात्र अवधि के अनुसार अलग-अलग होगा।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
माझ्या लेखांचा उद्देश लोकांना अचूक, योग्य आणि विश्वासार्ह माहिती उपलब्ध करून देणे हा आहे. मी नेहमी प्रयत्न करतो की माझ्या लेखनातील भाषा साधी-सोप्या स्वरूपाची असावी, माहिती उपयोगी असावी आणि वाचकांना कोणत्याही विषयाचे आकलन करण्यात अडचण येऊ नये.
