नई दिल्ली: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत हायर पेंशन (Higher Pension) का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल ट्रस्ट के नियमों या तकनीकी कारणों के आधार पर पात्र कर्मचारियों को उच्च पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए विशेष महत्व रखता है जो EPF में अपनी वास्तविक सैलरी (Actual Wages) के आधार पर योगदान करते रहे हैं, लेकिन EPFO ने उनकी उच्च पेंशन की मांग को अस्वीकार कर दिया था।
क्या है पूरा मामला?
कई कर्मचारियों ने EPFO के उस निर्णय को अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें उच्च पेंशन के लिए दिए गए संयुक्त विकल्प (Joint Option) को खारिज कर दिया गया था। EPFO का तर्क था कि संबंधित संस्थान के ट्रस्ट नियम वास्तविक वेतन पर पेंशन फंड में योगदान की अनुमति नहीं देते थे।
हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि यदि कर्मचारी और नियोक्ता ने वास्तविक वेतन के आधार पर भविष्य निधि (PF) में योगदान किया है, तो केवल ट्रस्ट नियमों के आधार पर उन्हें उच्च पेंशन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
अदालत के फैसले के अनुसार लाभ मुख्य रूप से उन कर्मचारियों को मिल सकता है:
जो 1 सितंबर 2014 को EPS के सदस्य थे।
जो उस समय सेवा में कार्यरत थे।
जिनके PF अंशदान वास्तविक वेतन के आधार पर जमा किए गए थे।
जिन्होंने उच्च पेंशन के लिए संयुक्त विकल्प (Joint Option) प्रस्तुत किया था।
हाईकोर्ट ने EPFO को क्या निर्देश दिए?
अदालत ने EPFO द्वारा जारी अस्वीकृति आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि पात्र कर्मचारियों के संयुक्त विकल्प स्वीकार किए जाएं और वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन की गणना की जाए। रिपोर्ट के अनुसार EPFO को निर्धारित समय सीमा के भीतर मामले का निपटारा करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मिला सहारा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में पहले दिए गए सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि केवल प्रक्रियात्मक या तकनीकी बाधाओं के कारण कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।
EPS-95 उच्च पेंशन विवाद क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के 2022 के ऐतिहासिक फैसले के बाद पात्र कर्मचारियों को वास्तविक वेतन के आधार पर उच्च पेंशन चुनने का अवसर दिया गया था। इसके बाद लाखों कर्मचारियों ने आवेदन किया, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदन विभिन्न कारणों से अस्वीकार कर दिए गए।
अब विभिन्न हाईकोर्टों के फैसले लगातार कर्मचारियों के पक्ष में आ रहे हैं, जिससे उच्च पेंशन की मांग कर रहे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
निष्कर्ष
कर्नाटक हाईकोर्ट का यह फैसला EPS-95 के तहत उच्च पेंशन की लड़ाई लड़ रहे हजारों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि आप भी 1 सितंबर 2014 को EPS सदस्य थे और वास्तविक वेतन पर PF अंशदान करते रहे हैं, तो यह फैसला आपके लिए राहत की खबर हो सकता है। आने वाले दिनों में EPFO की ओर से इस संबंध में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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