रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए पेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने Railway Services (Extraordinary Pension) Rules, 2026 को अधिसूचित किया है। इन नए नियमों ने पुराने 1993 के एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन नियमों की जगह ली है। नए नियमों में ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु या सेवा से जुड़ी परिस्थितियों में दिव्यांगता होने पर पेंशन और फैमिली पेंशन से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।
इन नियमों में कुछ विशेष परिस्थितियों में मृत रेलवे कर्मचारी के परिवार को वेतन के 100 प्रतिशत तक फैमिली पेंशन देने का प्रावधान है। हालांकि यह लाभ सभी मामलों में स्वतः लागू नहीं होगा। कर्मचारी की मृत्यु किस परिस्थिति में हुई और वह किस श्रेणी के मामले में आती है, इसके आधार पर पेंशन की दर निर्धारित होगी।
किन परिस्थितियों में मिलेगा 100 प्रतिशत तक लाभ?
नए नियमों के तहत ड्यूटी से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को असाधारण फैमिली पेंशन मिल सकती है। इनमें हिंसक घटनाएं, प्राकृतिक आपदा, आतंकी या उग्रवादी हमला तथा कुछ निर्धारित युद्ध जैसी परिस्थितियां शामिल हैं। इन मामलों को नियमों में अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।
Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित परिस्थितियों में फैमिली पेंशन कर्मचारी के वेतन के 100 प्रतिशत तक हो सकती है। वहीं न्यूनतम दिव्यांगता पेंशन और फैमिली पेंशन 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित की गई है।
इसलिए 100 प्रतिशत पेंशन की खबर को इस तरह समझना जरूरी है कि यह सामान्य फैमिली पेंशन की व्यवस्था नहीं है, बल्कि नियमों में निर्धारित विशेष परिस्थितियों में मिलने वाला लाभ है।
फैमिली पेंशन की गणना कैसे होगी?
नए नियमों में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अलग दर निर्धारित की गई है। उपलब्ध नियमों के अनुसार कुछ श्रेणियों में विधवा या विधुर तथा पात्र बच्चों को वेतन का 60 प्रतिशत फैमिली पेंशन मिल सकती है, जबकि कुछ निर्धारित श्रेणियों में यह दर वेतन के 100 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
उदाहरण से समझें तो यदि किसी पात्र मामले में कर्मचारी का संबंधित वेतन 50,000 रुपये है और उस मामले पर 100 प्रतिशत की दर लागू होती है, तो गणना 50,000 रुपये के आधार पर होगी। वहीं यदि संबंधित श्रेणी में 60 प्रतिशत की दर लागू होती है तो रकम 30,000 रुपये होगी।
यह केवल नियम को समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक पेंशन की गणना कर्मचारी के रिकॉर्ड, लागू श्रेणी और नियमों के अनुसार की जाएगी।
साधारण फैमिली पेंशन से अलग है व्यवस्था
रेलवे सेवा में सामान्य फैमिली पेंशन और एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन अलग-अलग प्रावधानों के तहत आती हैं।
Railway Services (Pension) Rules, 2026 के तहत सामान्य फैमिली पेंशन की गणना सामान्य तौर पर वेतन के 30 प्रतिशत के आधार पर होती है, जबकि निर्धारित परिस्थितियों में enhanced family pension का अलग प्रावधान है। एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन नियमों में सेवा से जुड़ी मृत्यु या दिव्यांगता के विशेष मामलों के लिए अलग दरें रखी गई हैं।
यही वजह है कि किसी रेलवे कर्मचारी के परिवार को मिलने वाली पेंशन केवल उसके अंतिम वेतन को देखकर तय नहीं की जा सकती। पहले यह देखना जरूरी होगा कि मामला किस नियम और किस श्रेणी के अंतर्गत आता है।
NPS कर्मचारियों को भी मिल सकता है लाभ
नए नियमों की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ परिस्थितियों में National Pension System यानी NPS के अंतर्गत आने वाले रेलवे कर्मचारियों को भी इन प्रावधानों का लाभ मिल सकता है।
अधिसूचना के अनुसार Railway Services (Implementation of National Pension System) Rules, 2025 के तहत आने वाले कर्मचारी यदि निर्धारित नियमों के अनुसार संबंधित विकल्प चुन चुके हैं, तो सेवा के दौरान मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन, फैमिली पेंशन और Constant Attendant Allowance जैसे लाभ लागू हो सकते हैं।
इसका मतलब यह है कि केवल पुरानी पेंशन व्यवस्था के कर्मचारियों तक ही इन प्रावधानों को सीमित नहीं रखा गया है। लेकिन NPS कर्मचारियों के मामले में संबंधित विकल्प और पात्रता शर्तें महत्वपूर्ण रहेंगी।
परिवार में सबसे पहले किसे मिलेगी पेंशन?
नए नियमों में फैमिली पेंशन के लिए परिवार के सदस्यों की पात्रता का क्रम भी निर्धारित किया गया है।
सबसे पहले पात्र विधवा या विधुर को रखा गया है। इसके बाद निर्धारित शर्तों के तहत आश्रित बच्चों, गोद लिए गए बच्चों और सौतेले बच्चों को पात्रता मिल सकती है।
इसके अलावा कुछ परिस्थितियों में माता-पिता तथा आश्रित भाई-बहनों को भी फैमिली पेंशन का लाभ मिल सकता है। हालांकि इन सभी मामलों में अलग-अलग पात्रता शर्तें लागू होती हैं।
विशेष रूप से दिव्यांग बच्चे के मामले में नियमों में अलग प्रावधान हैं। पात्रता पूरी होने पर कुछ परिस्थितियों में ऐसे बच्चे को निर्धारित नियमों के अनुसार लंबे समय तक या जीवनभर फैमिली पेंशन मिल सकती है।
कर्मचारी की दिव्यांगता होने पर भी लाभ
नए नियम केवल कर्मचारी की मृत्यु तक सीमित नहीं हैं। यदि रेलवे सेवा से जुड़ी परिस्थितियों के कारण कर्मचारी दिव्यांग हो जाता है और उसे सेवा से हटना पड़ता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत दिव्यांगता पेंशन का प्रावधान है।
ऐसी पेंशन में Service Element और Disability Element शामिल हो सकते हैं। दिव्यांगता की श्रेणी और प्रतिशत के आधार पर गणना अलग हो सकती है।
नियमों में न्यूनतम दिव्यांगता पेंशन के रूप में 18,000 रुपये प्रति माह का प्रावधान बताया गया है, हालांकि वास्तविक भुगतान संबंधित नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगा।
अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं
नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण सुविधा यह बताई गई है कि ऐसे मामलों में कर्मचारी या परिवार को असाधारण पेंशन का दावा शुरू करने के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत नहीं होगी।
यदि कर्मचारी की सेवा से जुड़ी मृत्यु या दिव्यांगता का मामला सामने आता है, तो मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित कार्यालय प्रमुख को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई शुरू करनी होगी।
Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद मामले को निर्धारित समय के भीतर सक्षम प्राधिकारी के सामने भेजने का प्रावधान है। केवल कार्यालय स्तर पर हुई देरी के कारण पात्र दावे को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
2026 के नए नियम क्यों महत्वपूर्ण हैं?
Railway Services (Extraordinary Pension) Rules, 2026 पुराने 1993 के नियमों को बदलते हैं। नई व्यवस्था में रेलवे कर्मचारियों की सेवा के दौरान मृत्यु और दिव्यांगता से जुड़े पेंशन लाभों को एक नए ढांचे में स्पष्ट किया गया है।
इसमें विशेष परिस्थितियों में परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन की दर, न्यूनतम राशि, परिवार के सदस्यों की पात्रता और NPS कर्मचारियों से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।
निष्कर्ष
रेलवे कर्मचारियों के लिए नए एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन नियम 2026 काफी महत्वपूर्ण हैं। ड्यूटी से जुड़ी निर्धारित परिस्थितियों में कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को नियमों के अनुसार वेतन के 100 प्रतिशत तक फैमिली पेंशन मिल सकती है। वहीं कुछ अन्य निर्धारित श्रेणियों में 60 प्रतिशत जैसी दर लागू होती है।
इसके अलावा सेवा से जुड़ी दिव्यांगता की स्थिति में भी पेंशन का प्रावधान किया गया है और न्यूनतम दिव्यांगता पेंशन तथा फैमिली पेंशन 18,000 रुपये प्रति माह निर्धारित की गई है।
हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि 100 प्रतिशत फैमिली पेंशन सभी रेलवे कर्मचारियों के परिवारों को नहीं मिलेगी। कर्मचारी की मृत्यु या दिव्यांगता की परिस्थितियों, संबंधित श्रेणी, परिवार के सदस्य की पात्रता और अन्य नियमों के आधार पर अंतिम लाभ निर्धारित होगा। इसलिए किसी भी कर्मचारी या परिवार को अपनी स्थिति के अनुसार संबंधित रेलवे कार्यालय और पेंशन रिकॉर्ड के आधार पर पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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