रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए पेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने Railway Services Extraordinary Pension Rules, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों ने साल 1993 में बनाए गए एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन नियमों की जगह ली है। नई व्यवस्था में ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मौत या दिव्यांगता होने की स्थिति में मिलने वाले पेंशन लाभ को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है।
नए नियमों में कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारी के परिवार को 100 प्रतिशत तक फैमिली पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा डिसएबिलिटी पेंशन, मेडिकल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील, पेंशन भुगतान में देरी होने पर ब्याज और सेवा से जुड़ी बीमारियों जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
1993 के नियमों की जगह नए नियम
रेलवे बोर्ड ने 10 सितंबर 2026 को नए नियमों की अधिसूचना जारी की और ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ लागू हो गए। इन नियमों को Railway Services Extraordinary Pension Rules, 2026 नाम दिया गया है। नए नियमों के तहत सेवा के दौरान मौत या दिव्यांगता से जुड़े मामलों को पहले की तुलना में अलग तरीके से वर्गीकृत किया गया है।
इन नियमों का उद्देश्य ऐसे रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों को पेंशन संबंधी सुरक्षा देना है, जिनकी दिव्यांगता या मृत्यु का संबंध रेलवे सेवा से जुड़ी परिस्थितियों से होता है।
किन कर्मचारियों और परिवारों को मिलेगा लाभ?
नए नियम उन रेलवे कर्मचारियों पर लागू होते हैं जो Railway Services Pension Rules, 2026 के अंतर्गत आते हैं। इसके अलावा NPS के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए भी कुछ परिस्थितियों में इन नियमों के तहत लाभ का प्रावधान है, लेकिन इसके लिए संबंधित कर्मचारी द्वारा निर्धारित नियमों के तहत विकल्प चुना जाना जरूरी है।
यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान ऐसी घटना होती है जिससे उसे दिव्यांगता होती है या उसकी मृत्यु हो जाती है और घटना का संबंध रेलवे सेवा से है, तो मामला नए एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन नियमों के तहत देखा जा सकता है।
मौत और दिव्यांगता की चार कैटेगरी
नए नियमों में सेवा से जुड़ी मौत और दिव्यांगता के मामलों को चार प्रमुख कैटेगरी में बांटा गया है। पेंशन और परिवार को मिलने वाला लाभ इसी वर्गीकरण के आधार पर तय होगा।
कैटेगरी A में ऐसी मृत्यु या दिव्यांगता आती है जिसका संबंध रेलवे सेवा से नहीं है और जो सामान्य या प्राकृतिक कारणों से हुई हो।
कैटेगरी B में ऐसी मृत्यु या दिव्यांगता शामिल है जो रेलवे सेवा के कारण हुई हो या रेलवे सेवा की वजह से किसी बीमारी या चोट की स्थिति गंभीर हुई हो।
कैटेगरी C में दंगे, हिंसा, खराब मौसम, राहत या बचाव अभियान जैसी गंभीर परिस्थितियों से जुड़े मामले शामिल किए गए हैं।
कैटेगरी D में आतंकवादी हमले, युद्ध जैसी परिस्थितियों या दुश्मन की कार्रवाई से जुड़े मामलों को रखा गया है।
इस वर्गीकरण का सीधा असर कर्मचारी की डिसएबिलिटी पेंशन और कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली पेंशन पर पड़ सकता है।
डिसएबिलिटी पेंशन का नया प्रावधान
नए नियमों में डिसएबिलिटी पेंशन को मुख्य रूप से सर्विस एलीमेंट और डिसएबिलिटी एलीमेंट के आधार पर तय किया जाएगा।
सर्विस एलीमेंट कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी यानी इमोल्यूमेंट्स या औसत इमोल्यूमेंट्स के 50 प्रतिशत के बराबर होगा, जो भी नियमों के अनुसार अधिक हो। वहीं कैटेगरी B, C और D में 100 प्रतिशत दिव्यांगता की स्थिति में डिसएबिलिटी एलीमेंट 30 प्रतिशत रखा गया है।
खास बात यह है कि इसके लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की शर्त नहीं रखी गई है। यानी 10 साल से कम सेवा वाले कर्मचारी को भी निर्धारित परिस्थितियों में सर्विस एलीमेंट का लाभ मिल सकता है। हालांकि ऐसी स्थिति में सर्विस ग्रेच्युटी से संबंधित अलग नियम लागू होंगे।
दिव्यांगता का प्रतिशत कैसे तय होगा?
डिसएबिलिटी पेंशन में मेडिकल बोर्ड द्वारा तय किया गया दिव्यांगता प्रतिशत महत्वपूर्ण होगा। नए नियमों में ब्रॉड-बैंडिंग का प्रावधान रखा गया है।
यदि मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता को 50 प्रतिशत तक निर्धारित करता है तो डिसएबिलिटी एलीमेंट की गणना उसी प्रतिशत के आधार पर होगी। 50 प्रतिशत से अधिक और 75 प्रतिशत तक की दिव्यांगता को गणना के लिए 75 प्रतिशत माना जा सकता है। वहीं 75 प्रतिशत से अधिक और 100 प्रतिशत तक की दिव्यांगता को 100 प्रतिशत माना जाएगा।
इसका उद्देश्य कुछ मामलों में दिव्यांगता पेंशन की गणना को अधिक अनुकूल बनाना है।
मौत होने पर परिवार को कितनी पेंशन मिलेगी?
नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन से जुड़ा है। पात्र परिवार में परिस्थितियों के अनुसार विधवा या विधुर, बच्चे तथा अन्य आश्रित सदस्य शामिल हो सकते हैं।
कैटेगरी A के मामलों में सामान्य पेंशन नियम लागू होंगे। लेकिन सेवा से जुड़ी गंभीर परिस्थितियों वाली कैटेगरी B, C और D में परिवार को विशेष प्रावधान के तहत पेंशन मिल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार कैटेगरी B में फैमिली पेंशन कर्मचारी की पे के 60 प्रतिशत के बराबर होगी। वहीं कैटेगरी C और D में फैमिली पेंशन कर्मचारी की बेसिक पे के 100 प्रतिशत तक हो सकती है। यानी कुछ विशेष ड्यूटी से जुड़ी मौत के मामलों में परिवार को कर्मचारी की पूरी बेसिक पे के बराबर फैमिली पेंशन का प्रावधान किया गया है।
नियमों के अनुसार फैमिली पेंशन की न्यूनतम राशि 18,000 रुपये प्रति माह से कम नहीं होगी। हालांकि वास्तविक भुगतान संबंधित कर्मचारी की स्थिति, घटना की कैटेगरी और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
दिव्यांग कर्मचारी की बाद में मृत्यु होने पर भी प्रावधान
यदि कोई कर्मचारी दिव्यांगता पेंशन प्राप्त कर रहा है और बाद में उसी चोट या बीमारी के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
यदि दिव्यांगता के कारण रिटायरमेंट की तारीख से सात साल के भीतर कर्मचारी की मृत्यु होती है, तो निर्धारित परिस्थितियों में परिवार को एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन का लाभ मिल सकता है।
नौकरी जारी रहने पर एकमुश्त भुगतान
यदि किसी कर्मचारी को सेवा के दौरान दिव्यांगता होती है लेकिन उसे रेलवे की नौकरी से हटाया नहीं जाता और वह सेवा जारी रखता है, तो हर महीने डिसएबिलिटी एलीमेंट का भुगतान करने के बजाय नियमों के अनुसार उसकी कैपिटलाइज्ड वैल्यू के आधार पर एकमुश्त मुआवजे का प्रावधान हो सकता है।
इससे उन कर्मचारियों को भी आर्थिक सुरक्षा मिलती है जो दिव्यांगता के बाद रेलवे में अपनी सेवा जारी रखते हैं। नए नियमों में इसकी गणना के लिए निर्धारित कम्यूटेशन फैक्टर का इस्तेमाल किया जाएगा।
पेंशन के लिए अलग आवेदन की जरूरत नहीं
नए नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया संबंधी बदलाव भी किया गया है। डिसएबिलिटी पेंशन या एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन के लिए कर्मचारी या परिवार को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित मामले को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हेड ऑफ ऑफिस की होगी और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इससे पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाने और परिवार को समय पर लाभ दिलाने में मदद मिल सकती है।
पेंशन में देरी हुई तो मिलेगा ब्याज
नए नियमों में पेंशन भुगतान में देरी को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। यदि प्रशासनिक गलती या लापरवाही के कारण पेंशन जारी होने में देरी होती है, तो पात्र पेंशनर या फैमिली पेंशनर को बकाया राशि पर नियमों के अनुसार ब्याज देने का प्रावधान है।
इसका मतलब है कि पेंशन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होने पर संबंधित कर्मचारी या परिवार को केवल बकाया पेंशन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि निर्धारित नियमों के अनुसार ब्याज का लाभ भी मिल सकता है।
मेडिकल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील
नए एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन नियमों में मेडिकल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील की व्यवस्था भी रखी गई है। इसके अलावा सेवा से जुड़ी बीमारियों, डिसएबिलिटी की गणना, ब्रॉड-बैंडिंग और अटेंडेंट अलाउंस जैसे मामलों को भी नियमों में शामिल किया गया है।
इससे रेलवे कर्मचारियों को अपनी दिव्यांगता और उससे जुड़े पेंशन लाभ के निर्धारण में निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा या अपील का अवसर मिलता है।
रेलवे कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं नए नियम?
रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए इन नियमों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि सेवा के दौरान होने वाली हर मृत्यु या दिव्यांगता पर समान पेंशन लाभ नहीं मिलेगा। सबसे पहले यह देखा जाएगा कि घटना किस कैटेगरी में आती है और उसका रेलवे सेवा से क्या संबंध है।
विशेष रूप से कैटेगरी B, C और D में आने वाले मामलों में कर्मचारी और उसके परिवार को सामान्य पेंशन व्यवस्था से अलग लाभ मिल सकते हैं। वहीं NPS कर्मचारियों के लिए लाभ उनके द्वारा चुने गए विकल्प और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, Railway Services Extraordinary Pension Rules, 2026 रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े सेवा-जनित मृत्यु और दिव्यांगता के मामलों में पेंशन व्यवस्था को नए सिरे से निर्धारित करते हैं। खास तौर पर कुछ गंभीर परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक फैमिली पेंशन, न्यूनतम 18,000 रुपये फैमिली पेंशन, डिसएबिलिटी पेंशन और पेंशन भुगतान में देरी पर ब्याज जैसे प्रावधान इस नई व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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