EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े कर्मचारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए पेंशन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि और कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS के तहत वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह बदलाव पेंशन की गणना में महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
Jagran की 22 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नई ₹25,000 की वेतन सीमा लागू होने पर EPS के तहत पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनका वेतन ₹25,000 या उससे अधिक है और जिनकी पेंशन की गणना मौजूदा सीमा के आधार पर होती है।
अभी तक ₹15,000 थी पेंशन योग्य वेतन की सीमा
EPS 1995 के तहत पेंशन की गणना पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा के आधार पर होती है। EPFO के उपलब्ध नियमों के अनुसार 1 सितंबर 2014 के बाद अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 प्रति माह रखा गया था। पेंशन योग्य वेतन सामान्य तौर पर संबंधित अवधि के औसत वेतन के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
इसका मतलब यह हुआ कि किसी कर्मचारी का वास्तविक बेसिक वेतन ₹25,000, ₹30,000 या इससे अधिक होने पर भी सामान्य EPS गणना में ₹15,000 की सीमा महत्वपूर्ण रहती थी।
अब ₹25,000 की नई सीमा की रिपोर्ट के बाद पेंशन की गणना का आधार बढ़ने की संभावना है। हालांकि वास्तविक पेंशन कर्मचारी की सेवा अवधि, पात्रता और लागू EPS नियमों के अनुसार तय होगी।
EPS पेंशन का फॉर्मूला क्या है?
EPS में सामान्य पेंशन गणना का फॉर्मूला इस प्रकार है:
पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70
यहां पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा अगर ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 होती है तो समान सेवा अवधि वाले कर्मचारी की गणना में बड़ा अंतर दिखाई दे सकता है।
उदाहरण के लिए यदि केवल गणितीय तुलना के लिए 10 साल की सेवा और ₹15,000 की सीमा ली जाए तो:
₹15,000 × 10 ÷ 70 = लगभग ₹2,143 प्रति माह
वहीं ₹25,000 की सीमा पर:
₹25,000 × 10 ÷ 70 = लगभग ₹3,571 प्रति माह
इस तरह दोनों के बीच लगभग ₹1,428 प्रति माह का अंतर बनता है।
10 साल की नौकरी पर कितना अंतर?
अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा 10 साल है तो ₹15,000 की सीमा पर गणना लगभग ₹2,143 मासिक बैठती है।
वहीं ₹25,000 की सीमा पर यही गणना लगभग ₹3,571 मासिक होती है।
यानी इस उदाहरण में मासिक अंतर करीब ₹1,428 है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक उदाहरण आधारित गणना है। वास्तविक EPS पेंशन में सेवा की गणना और अन्य लागू नियमों को भी देखा जाता है।
15 साल की नौकरी पर पेंशन
अब 15 साल की सेवा का उदाहरण लेते हैं।
पुरानी ₹15,000 की सीमा पर:
₹15,000 × 15 ÷ 70 = लगभग ₹3,214 प्रति माह
नई ₹25,000 की सीमा पर:
₹25,000 × 15 ÷ 70 = लगभग ₹5,357 प्रति माह
इस हिसाब से दोनों गणनाओं में करीब ₹2,143 प्रति माह का अंतर आता है।
यानी लंबे समय तक EPS में योगदान करने वाले कर्मचारी के लिए पेंशन योग्य वेतन सीमा में बढ़ोतरी का असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।
20 साल की नौकरी पर 2 साल का अतिरिक्त लाभ
EPS नियमों में 20 साल या उससे अधिक की पेंशन योग्य सेवा पूरी करने और 58 वर्ष की आयु में सुपरएनुएशन पर पेंशन योग्य सेवा में 2 साल की वेटेज यानी अतिरिक्त सेवा जोड़ने का प्रावधान है। EPFO के EPS नियमों में यह प्रावधान स्पष्ट रूप से दिया गया है।
इसलिए 20 साल की पात्र सेवा के उदाहरण में 22 साल की सेवा को गणना के लिए लिया जा सकता है।
₹15,000 की सीमा पर:
₹15,000 × 22 ÷ 70 = लगभग ₹4,714 प्रति माह
₹25,000 की सीमा पर:
₹25,000 × 22 ÷ 70 = लगभग ₹7,857 प्रति माह
दोनों के बीच लगभग ₹3,143 प्रति माह का अंतर आता है।
25 साल की नौकरी पर कितना फायदा?
अगर किसी कर्मचारी की सेवा 25 साल है और पात्रता के अनुसार 2 साल की वेटेज भी लागू होती है, तो गणना के लिए 27 साल की सेवा मानी जा सकती है।
₹15,000 की सीमा पर:
₹15,000 × 27 ÷ 70 = लगभग ₹5,786 प्रति माह
₹25,000 की सीमा पर:
₹25,000 × 27 ÷ 70 = लगभग ₹9,643 प्रति माह
इस उदाहरण में मासिक अंतर लगभग ₹3,857 बनता है।
यानी जैसे-जैसे पेंशन योग्य सेवा बढ़ती है, पेंशन योग्य वेतन सीमा बढ़ने का गणितीय प्रभाव भी बढ़ता जाता है।
66.6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की बात क्यों हो रही है?
₹15,000 से ₹25,000 की सीमा बढ़ने पर पेंशन योग्य वेतन में लगभग 66.6 प्रतिशत की वृद्धि होती है। इसी अनुपात के कारण समान सेवा अवधि पर केवल वेतन सीमा के आधार पर निकाली गई पेंशन में भी लगभग 66.6 प्रतिशत का अंतर दिखाई देता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर EPS पेंशनर की वास्तविक पेंशन सीधे 66.6 प्रतिशत बढ़ जाएगी। वास्तविक पेंशन का निर्धारण लागू नियमों, पेंशन योग्य सेवा, औसत पेंशन योग्य वेतन और कर्मचारी की स्थिति के आधार पर होगा।
₹30,000 बेसिक वाले कर्मचारी का उदाहरण
मान लीजिए किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹30,000 है और उसकी पेंशन योग्य सेवा 20 साल है।
यदि पेंशन योग्य वेतन की सीमा ₹25,000 मानी जाती है तो सामान्य सूत्र के आधार पर:
₹25,000 × 20 ÷ 70 = लगभग ₹7,143 प्रति माह
वहीं ₹15,000 की सीमा पर:
₹15,000 × 20 ÷ 70 = लगभग ₹4,286 प्रति माह
हालांकि 20 साल की पात्र सेवा पर लागू 2 साल की वेटेज को शामिल करने पर गणना अलग हो सकती है। इसलिए केवल बेसिक वेतन देखकर किसी व्यक्ति की अंतिम EPS पेंशन तय नहीं की जा सकती।
कर्मचारियों को क्या समझना चाहिए?
EPFO और EPS से जुड़े कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वेतन सीमा बढ़ने का असर सभी कर्मचारियों पर एक जैसा नहीं होगा। जिन कर्मचारियों का पेंशन योग्य वेतन पहले से ₹15,000 की सीमा पर सीमित था, उनके लिए बदलाव का प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
वहीं जिन कर्मचारियों की स्थिति उच्च वेतन पर EPS योगदान या पुराने उच्च पेंशन विकल्प से जुड़ी है, उनके मामले में अलग नियम लागू हो सकते हैं। EPFO के दस्तावेजों में भी 1 सितंबर 2014 को मौजूद कुछ सदस्यों के लिए उच्च वेतन पर योगदान और पेंशन से संबंधित अलग प्रावधानों का उल्लेख है।
निष्कर्ष
EPFO की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किए जाने की रिपोर्ट नौकरीपेशा लोगों और EPS से जुड़े कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। नई सीमा लागू होने पर पेंशन की गणना का अधिकतम आधार बढ़ सकता है और लंबे समय तक नौकरी करने वाले पात्र कर्मचारियों को इसका फायदा मिल सकता है।
10 साल की सेवा में उदाहरण के तौर पर करीब ₹3,571, 15 साल में करीब ₹5,357 और 25 साल की सेवा में 2 साल की वेटेज सहित करीब ₹9,643 मासिक पेंशन की गणना सामने आती है, जबकि पुरानी ₹15,000 सीमा पर ये आंकड़े क्रमशः करीब ₹2,143, ₹3,214 और ₹5,786 हैं।
हालांकि ये आंकड़े समझाने के लिए गणितीय उदाहरण हैं। किसी कर्मचारी की वास्तविक EPS पेंशन उसके रिकॉर्ड और लागू नियमों के अनुसार ही निर्धारित होगी।

माझं नाव एन. डी. यादव आहे. मला लेखन क्षेत्रात ६ वर्षांचा अनुभव आहे. माझ्या लेखन प्रवासात मी सरकारी धोरणे, कर्मचारी व निवृत्तीवेतनधारकांचे हक्क, पेन्शन योजना तसेच जनकल्याणकारी योजना याबाबतची माहिती तुम्हांपर्यंत सोप्या आणि स्पष्ट भाषेत पोहोचवण्याचे कार्य केले आहे.
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